भोपाल। 
एमपी में गेहूं खरीदी को लेकर लगातार समस्याएं सामने आ रहीं हैं। प्रदेश में 5 एकड़ से कम जमीन वाले किसानों के गेहूं की खरीद 9 और 15 अप्रैल से शुरू हुई है। लेकिन, गेहूं उपार्जन में पोर्टल की कई समस्याओं के कारण किसान परेशान हो रहे हैं। किसानों की समस्याओं को लेकर गुरुवार को भोपाल में कांग्रेस सेवादल के मुख्य संगठक अवनीश भार्गव सत्याग्रह कर रहे हैं। भार्गव 24 घंटे का उपवास कर रहे हैं। इस सत्याग्रह में पीसीसी चीफ जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, किसान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष धर्मेन्द्र सिंह चौहान सहित कांग्रेस के तमाम नेता और कार्यकर्ता शामिल हो रहे हैं। भोपाल के आसपास के जिलों से किसानों को भी इस सत्याग्रह में बुलाया गया है।
सेवादल के संगठक बोले- किसानों को परेशान करना चाहती है सरकार
कांग्रेस सेवादल के मुख्य संगठक अवनीश भार्गव ने कहा हमारी मुख्य मांग यही है कि गेहूं का उपार्जन मप्र की सरकार को करना चाहिए। मंत्री और मुख्यमंत्री कहते हैं कि हम दाना-दाना खरीदेंगे। लेकिन, जब खरीदी शुरू होती है तो कहते हैं कि पहले 5 एकड़ के किसानों की खरीदी करेंगे। आप किसानों में भेदभाव क्यों कर रहे हैं।
किसानों में भेदभाव क्यों किया जा रहा
भार्गव ने कहा- जब सरकार ने गेहूं उपार्जन के लिए पंजीयन कराया और किसान ने अपना पंजीयन किया है तो उसका दाना-दाना तुलवाना चाहिए। उसके बावजूद किसानों में भेदभाव किया जा रहा है। यही नहीं जो किसान पंजीयन के बाद स्लॉट बुक कराने जा रहा है तो कहा जा रहा है कि आपका सैटेलाइट वेरिफिकेशन नहीं हैं।
छोटे किसानों से कहा जा रहा कि आपका खाता डीबीटी के लिए आधार से लिंक नहीं हैं। एक के बाद गेहूं खरीदी में अवरोध पैदा किए जा रहे हैं। सरकार की मंशा गेहूं खरीदी की नहीं बल्कि, किसानों को परेशान करने की है।
‘जब गेहूं खरीदा ही नहीं तो किसान डिफॉल्टर कैसे कर दिए’
अवनीश भार्गव ने कहा- एक महत्वपूर्ण मुद्दा यह भी है कि आपने किसान को 31 मार्च को ऋण अदा न कर पाने के कारण सहकारी समिति में डिफॉल्टर कर दिया। उससे साल भर का ब्याज ले रहे हैं। जब आपने गेहूं खरीदा ही नहीं तो उसके पहले किसान डिफॉल्टर कैसे हुआ? साल भर का ब्याज लेने का क्या औचित्य है? यदि जितने दिन लेट हुआ है उतने दिन का ब्याज ले लो। पूरे साल का ब्याज लेना न्यायोचित नहीं हैं। सरकार को पुर्नविचार करना चाहिए।