ग्वालियर-चंबल में ईमानदारी की जंग: जांबाज IPS आयुष जाखड़ के खिलाफ 'खाकी' का ही चक्रव्यूह!
भोपाल/शिवपुरी, सबकी खबर।
मध्य प्रदेश की सियासत और पुलिस महकमे में इन दिनों एक नाम सबसे ज्यादा गूंज रहा है— IPS आयुष जाखड़। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि इस युवा अफसर को किसी अपराधी या नेता से उतना खतरा नहीं है, जितना खुद उनके अपने विभाग के 'भ्रष्ट कॉकस' से है। सबकी खबर के इस सनसनीखेज खुलासे ने पुलिस महकमे की नींद उड़ा दी है। आइए समझते हैं कि आखिर क्यों एक ईमानदार अफसर के पीछे पूरा तंत्र हाथ धोकर पड़ा है।
प्रीतम लोधी तो सिर्फ 'मोहरा' हैं!
हाल ही में बीजेपी विधायक प्रीतम लोधी ने IPS जाखड़ को "घर में गोबर भरने" और "250 किलो के हाथ" की धमकी दी। लेकिन पर्दे के पीछे की कहानी कुछ और है। सूत्रों और रिपोर्ट की मानें तो लोधी को ढाल बनाकर वो पुलिस अधिकारी वार कर रहे हैं, जिनकी अवैध वसूली की दुकानें आयुष जाखड़ ने बंद कर दी हैं।
वो 3 मामले, जिन्होंने 'भ्रष्ट तंत्र' की चूलें हिला दीं
गुना हवाला कांड की 'विस्फोटक' रिपोर्ट
गुना में सड़क पर हुई लूट और हवाला कांड की जांच जब आयुष जाखड़ को मिली, तो उन्होंने बिना किसी दबाव के दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया। उनकी रिपोर्ट के कारण 4 पुलिसवाले बर्खास्तगी की कगार पर हैं और तत्कालीन SP अंकित सोनी को हटना पड़ा।
दलाल 'नीरज जादौन' का पर्दाफाश
पुलिस और अपराधियों के बीच की कड़ी कहे जाने वाले दलाल नीरज जादौन को जब जाखड़ ने पूछताछ के लिए उठाया, तो महकमे के कई बड़े चेहरों के चेहरे सफेद पड़ गए। जादौन के जरिए करोड़ों की वसूली करने वाले 'वर्दीधारी' अब जाखड़ को फंसाने के लिए हाईकोर्ट तक की दौड़ लगा रहे हैं।
सिकंदरा बैरियर का 'वसूली गैंग'
आरटीओ और पुलिस की मिलीभगत से चल रहे वसूली के खेल (कटर गैंग) पर जाखड़ ने जैसे ही नकेल कसी, उनके खिलाफ षड्यंत्रों का जाल और गहरा हो गया।
अपराधियों से नहीं, अपनों से खतरा!
आयुष जाखड़ जिस 'मिट्टी' के बने हैं, वो झुकने वाले नहीं हैं। उन्होंने साफ कहा था— "खाकी पहनी है तो इसका सम्मान होना चाहिए।" लेकिन विडंबना देखिए एक तरफ वो अधिकारी हैं जो सड़क पर खड़े होकर लूट करवा रहे हैं। दूसरी तरफ एक युवा IPS है जो सिस्टम को साफ करना चाहता है।"आयुष को खतरा राजनेताओं या अपराधियों से नहीं, बल्कि पुलिस विभाग में बरसों से जमे उन भ्रष्ट मगरमच्छों से है जिनकी काली कमाई पर इस अफसर ने चोट की है।"
DGP से सीधी गुहार
आज सवाल मध्य प्रदेश के DGP कैलाश मकवाना और ADG सीआईडी पंकज श्रीवास्तव से है। क्या एक ईमानदार अफसर को इस तरह अकेला छोड़ दिया जाएगा?
क्या अंकित सोनी जैसे विवादित अधिकारियों को फिर से रसूख वाले प्रभार दिए जाएंगे?
क्या 'ईमानदारी' का इनाम 'धमकियां' और 'षड्यंत्र' होगा?
मध्य प्रदेश पुलिस को अगर अपनी साख बचानी है, तो आयुष जाखड़ जैसे अफसरों को संरक्षण देना ही होगा। वरना, "गोबर भर देने" जैसी धमकियां सिर्फ एक अफसर को नहीं, बल्कि पूरे न्याय तंत्र को दी जा रही हैं।

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