इंदौर ।
मध्यप्रदेश में कांग्रेस आईटी सेल के कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी को लेकर मामला तेजी से राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है। विपक्षी नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है। वहीं वसुंधरा राजे के वायरल लेटर पर प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी का बयान सामने आया है। जीतू पटवारी ने कहा कि वसुंधरा राजे सिंधिया का लेटर कुछ दिन पहले सामने आया, तीन दिन बाद वसुंधरा राजे ने लेटर को अपना नहीं बताया। जब वसुंधरा राजे का लेटर वायरल हुआ तो सरकार ने हमारे कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया। अगर एफआईआर करनी है तो मुझ पर की जाए, इस तरह की यदि यातनाएं दी तो सभी कांग्रेस के कार्यकर्ता कैंपेन चलाएंगे कि मुझ पर एफआईआर करो। वहीं कांग्रेस प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने सोशल मीडिया पर इस कार्रवाई को “अवैध और अलोकतांत्रिक” बताया। उनका कहना है कि कार्यकर्ताओं को 24 घंटे से अधिक समय तक हिरासत में रखना कानून के खिलाफ है और यह सत्ता के दुरुपयोग का संकेत देता है। वहीं राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने भी इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए कहा कि यदि जल्द न्याय नहीं मिला, तो वे इस मामले को सुप्रीम कोर्ट तक ले जाएंगे। पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि बिना ठोस सबूत के गिरफ्तारी की गई है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पहले कुछ लोगों को छोड़ा गया और बाद में तीन कार्यकर्ताओं को हिरासत में रखा गया, साथ ही उनके मोबाइल भी जब्त कर लिए गए।
यह है पूरा विवाद
पूरा मामला सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़ा है, जिसमें वसुंधरा राजे के कथित फर्जी पत्र को साझा करने का आरोप है। इस बात को लेकर भोपाल में आईटी सेल के लोगों को गिरफ्तार किया गया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यदि चार्ज लगना है तो राजस्थान में कार्रवाई करें। तीन दिन के बाद ट्वीट डिलीट किया गया। मध्यप्रदेश में यह कार्रवाई क्यों की जा रही है, बेहद आपत्तिजनक है। विवेक तन्खा ने भी ट्वीट किया है कि मामले को सुप्रीम कोर्ट में ले जाया जाएगा। ऐसा कृत्य बर्दाश्त नहीं करेंगे।
थाने पहुंचा कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल
कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल, मुकेश नायक के नेतृत्व में एमपी नगर थाने पहुंचा और पुलिस अधिकारियों से चर्चा की। पार्टी का कहना है कि यह कार्रवाई राजनीतिक दबाव में की गई है और इसे तुरंत रोका जाना चाहिए।
आगे क्या?
कांग्रेस नेताओं ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं की तत्काल रिहाई की मांग की है और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई गई है। सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी भी जताई गई है। यह मामला अब सिर्फ कानूनी नहीं बल्कि राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस और न्यायालय इस पर क्या रुख अपनाते हैं।