भोपाल। 
राजधानी भोपाल में प्रदेश भाजपा कार्यालय के सामने भाजपा के प्रदेश सह मीडिया प्रभारी अंशुल तिवारी द्वारा लगवाया गया एक होर्डिंग शहरभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। इस होर्डिंग में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के साथ विपक्षी गठबंधन के अन्य प्रमुख चेहरों- ममता बनर्जी, अखिलेश यादव और एमके स्टालिन की तस्वीरें लगाई गई हैं।
होर्डिंग पर लिखा गया है कि 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम को रोक दिया, इन परजीवियों ने मिलकर महिलाओं का हक छीन लिया।'
बीजेपी ऑफिस के सामने लगे होर्डिंग को युवा कांग्रेसियों ने फाड़ा
पोस्टर की जानकारी लगने के बाद युवा कांग्रेस के आधा दर्जन कार्यकर्ता बीजेपी ऑफिस के सामने पहुंचे और पोस्टर फाड़ दिया। भोपाल युवा कांग्रेस के कार्यकारी जिला अध्यक्ष अमित खत्री के नेतृत्व में युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने राहुल गांधी जिंदाबाद के नारे लगाते हुए पोस्टर फाड़ दिया।
बीजेपी ने कहा- दवा का छिड़काव कर राजनीतिक परजीवियों को नारी शक्ति समाप्त करेगी
पोस्टर लगवाने वाले बीजेपी के प्रदेश सह मीडिया प्रभारी अंशुल तिवारी ने कहा- जो परजीवी होता है वो खुद कुछ नहीं करता वो दूसरों के हक को मारकर अपनी तृप्ति करता है और अपने भोजन का प्रबंध करता है। उसी प्रकार कुछ राजनीतिक परजीवी होते हैं जो अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने के लिए दूसरों का हक मारते हैं। यही काम आज भारत की राजनीति के परजीवियों ने किया है। उन्होंने भारत की नारियों, बेटियों का हक मारा है।
जिस तरीके से पैरासाइट के लिए दवाओं और केमिकल का छिड़काव किया जाता है। एक ऐसा वातावरण बनाया जाता है ताकि उनको हर तरीके से नष्ट किया जा सके। उसी प्रकार ऐसा वातावरण आज भोपाल की सड़कों पर देखने को मिला। हमारी माताएं बहनें ऐसा ही दवाओं का छिड़काव भी करेंगी और वातावरण का निर्माण करेंगी। ताकि इन राजनीतिक परजीवियों के झूठे वादों और उनके झूठे चेहरे और दोहरे मापदंड को उजागर करके इनकी राजनीति खत्म करने का काम भारत की नारियां और बेटियां करेंगी।
महिला आरक्षण बिल को लेकर विपक्ष पर बोला हमला
बीजेपी ने बीते 17 अप्रैल को लोकसभा में महिला आरक्षण के लिए लाए गए तीन बिल पारित न हो पाने के लिए कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों को जिम्मेदार ठहराया है। बीजेपी लगातार कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों पर हमला बोल रही है। इसी कड़ी में बीजेपी के सह मीडिया प्रभारी ने होर्डिंग में विपक्षी दलों के नेताओं को परजीवी बताया है।
लोकसभा में महिला आरक्षण का बिल नहीं हो पाया पारित
16 और 17 अप्रैल 2026 को भारतीय संसद में अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक विधायी घटनाक्रम हुआ। सरकार ने महिलाओं को 2029 के लोकसभा चुनावों से ही आरक्षण का लाभ देने के उद्देश्य से एक विशेष विधायी पैकेज पेश किया था, लेकिन यह संवैधानिक प्रक्रिया की अनिवार्य शर्तों को पूरा न कर पाने के कारण गिर गया।