भोपाल। 
मध्यप्रदेश कांग्रेस की वरिष्ठ नेत्री और पूर्व मंत्री डॉ. विजयलक्ष्मी साधौ ने अपनी ही पार्टी के दिग्गज नेताओं की सोच पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शुक्रवार को भोपाल के रवीन्द्र भवन में आयोजित कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्षों के सम्मेलन में साधौ ने पुरानी यादों को ताजा करते हुए बताया कि दिग्विजय सिंह सरकार के समय पहली बार महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की बात आई थी, तब कैबिनेट के बड़े-बड़े 'धुरंधर' इसके विरोध में थे।
महिलाओं को सिर्फ सालों से हारने वाली सीटों के टिकट न दें
साधौ ने मंच से कहा कि 1985 का दौर राजीव गांधी का था, जिन्होंने महिलाओं और युवाओं को तरजीह दी। उसी दौर में वे स्वयं विधायक बनीं और तब अविभाजित मध्यप्रदेश में 32 महिलाएं चुनकर आई थीं। साधौ ने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के मंत्रिमंडल का जिक्र करते हुए कहा, मैं सौभाग्यशाली हूं कि उस मंत्रिमंडल की सिपाही थी। जब 33 प्रतिशत आरक्षण की बात आई, तब कैबिनेट में सुभाष यादव, राजेन्द्र शुक्ला, प्यारेलाल कंवर और मुशरान जी जैसे बड़े नाम शामिल थे। ये सभी धुरंधर एक सुर में कह रहे थे कि जो महिलाएं किचन और घूंघट से बाहर नहीं आतीं, उनके लिए 33 प्रतिशत आरक्षण कहां से लाएंगे? साधौ ने आगे कहा कि जब चुनाव हुए तो उन्हीं महिलाओं ने 33 प्रतिशत के मुकाबले 38 प्रतिशत सीटें जीतकर अपनी ताकत दिखाई और विरोध करने वालों की भृकुटी तन गई। इसके साथ ही उन्होंने वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और प्रभारी हरीश चौधरी को भी नसीहत दी कि महिलाओं को सिर्फ उन सीटों पर टिकट न थमाएं जहां कांग्रेस सालों से हार रही है।
टिकट वितरण पर साधौ का 'कड़वा सच'
डॉ. विजयलक्ष्मी साधौ ने संगठन के कामकाज पर भी उंगली उठाई। उन्होंने बताया कि जब वे एआईसीसी की सचिव और महिला कांग्रेस की प्रभारी थीं, तब महिलाओं की भर्ती (टिकट वितरण) केवल उन सीटों पर की जाती थी, जहां पार्टी चार-पांच बार से लगातार हार रही होती थी। उन्होंने वर्तमान नेतृत्व से आग्रह किया कि भविष्य में महिलाओं को सिर्फ 'भर्ती' के लिए इस्तेमाल न किया जाए, बल्कि उन्हें जीतने योग्य और सुरक्षित सीटों पर भी मौका दिया जाए।
बीजेपी का पलटवार: "कांग्रेस हमेशा से महिला विरोधी"
डॉ. साधौ के इस बयान के बाद भाजपा ने कांग्रेस को आड़े हाथों लिया है। कालापीपल से भाजपा विधायक घनश्याम चंद्रवंशी ने कहा कि साधौ के बयान ने कांग्रेस का असली चेहरा उजागर कर दिया है। उन्होंने कहा कि एक वरिष्ठ महिला नेत्री ने खुद स्वीकार कर लिया है कि कांग्रेस के बड़े नेता शुरू से ही महिला आरक्षण के विरोधी रहे हैं। भाजपा के अनुसार, यह बयान साबित करता है कि कांग्रेस में महिलाओं को केवल चुनावी मोहरे के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है।