'मोदी जी रील और रियल लाइफ में बहुत अंतर होता है': राज्यसभा सांसद अशोक सिंह का पीएम पर तंज, नारी शक्ति वंदन अधिनियम को बताया 'चुनावी स्टंट'!
भोपाल।
16 अप्रैल से शुरू हो रहे संसद के विशेष सत्र को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। मध्य प्रदेश से कांग्रेस के राज्यसभा सांसद अशोक सिंह ने इस सत्र और 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
"जल्दबाजी में लाया गया बिल, सिर्फ वोटों की राजनीति"
सांसद अशोक सिंह ने कहा कि कांग्रेस हमेशा से महिलाओं के सम्मान की पक्षधर रही है और पार्टी ने हमेशा देश के मान-सम्मान के लिए काम किया है। उन्होंने बिल की टाइमिंग पर सवाल उठाते हुए कहा - सरकार ने पहले कहा था कि जनगणना के बाद इसे लागू करेंगे, लेकिन अब अचानक यह बिल ले आए। यह समझ से बाहर है कि सरकार क्या करना चाहती है। नारी मां स्वरूप पूजनीय है, उसके सम्मान में किसी भारतीय को आपत्ति नहीं हो सकती, लेकिन जिस तरह से यह बिल लाया गया है, उसमें कई खामियां हैं।
वंचित वर्गों की अनदेखी का आरोप
अशोक सिंह ने मध्य प्रदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि स्थानीय निकायों में 50 फीसदी आरक्षण के दौरान SC, ST और OBC वर्गों का पूरा ध्यान रखा गया था। उन्होंने वर्तमान अधिनियम की आलोचना करते हुए कहा- इस बिल में समाज के कमजोर और वंचित वर्गों (OBC/SC/ST) के लिए स्पष्ट प्रावधान नहीं हैं। जब तक सबको बराबरी पर खड़ा नहीं किया जाएगा, यह बिल बेमानी है।
जनगणना पर सवाल
पीएम मोदी ने अप्रैल से जनगणना शुरू करने की घोषणा की थी, जो अब तक शुरू नहीं हुई। यह स्पष्ट करता है कि सरकार का उद्देश्य महिलाओं को अधिकार देना नहीं, बल्कि सिर्फ वोटों की राजनीति करना है।
पीएम के 'गृहस्थ' वाले बयान पर तंज
प्रधानमंत्री के उस बयान पर जिसमें उन्होंने कहा था कि 'मैं गृहस्थ नहीं हूं लेकिन महिलाओं का दर्द समझता हूं', अशोक सिंह ने पलटवार करते हुए कहा- रियल लाइफ और रील लाइफ में बहुत अंतर होता है। मोदी जी काम से ज्यादा मार्केटिंग और पब्लिसिटी में विश्वास करते हैं।पिछले 11-12 सालों में जनता के टैक्स के लाखों-करोड़ों रुपए सिर्फ प्रचार में बर्बाद किए गए हैं। मेरी सरकार से मांग है कि इस फिजूलखर्ची पर तुरंत रोक लगाई जाए।
विशेष सत्र में कांग्रेस की रणनीति
आगामी सत्र को लेकर अशोक सिंह ने साफ किया कि कांग्रेस पार्टी महिलाओं के सम्मान के लिए सबसे आगे खड़ी है। उन्होंने कहा कि सत्र के दौरान कांग्रेस सरकार से मांग करेगी कि बिल की तकनीकी और सामाजिक खामियों को दूर किया जाए। समाज के कमजोर और वंचित वर्गों को आरक्षण के भीतर उचित अधिकार और हिस्सेदारी सुनिश्चित की जाए।

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