खाकी का अहंकार: 80 साल के रिटायर्ड DSP को बनाया 'अपराधी', पन्ना SP के खिलाफ सड़क पर उतरे दिग्गज IPS
इंदौर/भोपाल।
मध्य प्रदेश पुलिस के इतिहास में पहली बार एक ऐसा मंजर देखने को मिला जिसने खाकी की कार्यप्रणाली पर गहरा कलंक लगा दिया है। पन्ना की SP निवेदिता नायडू के एक अमानवीय फैसले के खिलाफ प्रदेश के सबसे वरिष्ठ और दिग्गज रिटायर्ड IPS अधिकारी सड़कों पर उतर आए हैं। जिस पुलिस ने अपराधियों के छक्के छुड़ाए, आज वही पुलिस अपने ही एक बुजुर्ग पूर्व अधिकारी के सम्मान की रक्षा के लिए 'अपनों' के खिलाफ मोर्चा खोलने को मजबूर है।
क्या है पूरा मामला?
बीते 7 अप्रैल को 80 वर्षीय रिटायर्ड DSP भरत सिंह चौहान अपनी पत्नी के साथ ग्वालियर जा रहे थे। रास्ते में पन्ना पुलिस ने उन्हें केवल सीट बेल्ट न लगाने के कारण रोका। 40 साल पुलिस विभाग को सींचने वाले चौहान साहब की याददाश्त अब कमजोर हो चुकी है, लेकिन वर्दी के अहंकार में चूर पन्ना पुलिस ने उनके साथ किसी आतंकवादी जैसा व्यवहार किया। उनकी 76 वर्षीय पत्नी गिड़गिड़ाती रहीं कि वे बीमार हैं, बुजुर्ग हैं, लेकिन पुलिसकर्मियों ने बदतमीजी की सारी हदें पार कर दीं।
सत्ता का नशा और अमानवीय कार्रवाई
हैरानी की बात यह है कि मामूली ट्रैफिक उल्लंघन को पन्ना SP निवेदिता नायडू के इशारे पर संगीन जुर्म में बदल दिया गया। 80 साल के बुजुर्ग और उनकी पत्नी पर सरकारी कार्य में बाधा डालने की धाराएं लगाई गईं।आर्म्स एक्ट (25/27) के तहत फर्जी मुकदमा दर्ज किया गया (जबकि बंदूक लाइसेंसी थी)। दोनों बुजुर्गों को गिरफ्तार कर कोर्ट ले जाया गया। "भला हो माननीय डिस्ट्रिक्ट जज का, जिन्होंने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए 1 मिनट में जमानत दे दी। जो बात एक जज को समझ आई, वो जिले की कप्तान (SP) को समझ क्यों नहीं आई?"
रिटायर्ड IPS लॉबी में भारी आक्रोश
सोमवार को इंदौर में मध्य प्रदेश के पूर्व शीर्ष पुलिस अधिकारियों (अनिल कुमार, एस.के. दास, डी.एस. सेंगर, धर्मेंद्र चौधरी आदि) ने पैदल मार्च निकालकर पुलिस कमिश्नर को ज्ञापन सौंपा। इन अधिकारियों का कहना है कि यह घटना केवल एक व्यक्ति का अपमान नहीं, बल्कि पूरी पुलिस परंपरा का अपमान है। SP निवेदिता नायडू को तत्काल पद से हटाया जाए और उन्हें वापस ट्रेनिंग पर भेजा जाए ताकि वे 'मानवीय चेहरा' सीख सकें। बुजुर्ग भरत सिंह चौहान के खिलाफ दर्ज फर्जी FIR को तुरंत वापस लिया जाए या मामले की जांच CID को सौंपी जाए। दोषी पुलिसकर्मियों को तत्काल सस्पेंड किया जाए। 70 वर्ष से ऊपर के रिटायर्ड अधिकारियों के साथ व्यवहार के लिए नई गाइडलाइन जारी हो।
DGP और मुख्यमंत्री से सीधा सवाल
यह DGP कैलाश मकवाना के कार्यकाल का सबसे 'काला अध्याय' माना जा रहा है। सवाल यह है कि क्या मुख्यमंत्री मोहन यादव ऐसे 'बदमिजाज' अधिकारियों को संरक्षण देंगे या बुजुर्गों के सम्मान में कड़ा फैसला लेंगे? अगर 24 घंटे में कार्रवाई नहीं हुई, तो यह चिंगारी ग्वालियर और भोपाल तक फैलने को तैयार है। पुलिस विभाग का अनुशासन डंडे से नहीं, सम्मान से चलता है—और पन्ना में उसी सम्मान की धज्जियां उड़ाई गई हैं।

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