भोपाल।
राजधानी में गरीबों के निवाले पर डाका डालने वाला एक बड़ा सफेदपोश गिरोह पकड़ा गया है। एमपी नगर एसडीएम कार्यालय की आधिकारिक आईडी और पासवर्ड का अवैध उपयोग कर ऐसे लोगों के बीपीएल राशनकार्ड जारी कर दिए गए, जिनके पास आलीशान मकान, गाड़ियां और 50 हजार रुपये तक का मासिक वेतन है। इस सनसनीखेज खुलासे के बाद जिला प्रशासन ने तत्काल 37 फर्जी कार्ड निरस्त कर दिए हैं।
बाबू से लेकर ऑपरेटर तक... सब मिले थे खेल में
जांच में सामने आया कि यह कोई मामूली गलती नहीं, बल्कि एक सोची-समझी साजिश थी। वन विभाग के वन रक्षक किशोर मेहरा, जिनके पास कार्यालय की महत्वपूर्ण आईडी-पासवर्ड थे, उन्होंने पीडब्ल्यूडी के कार्यपालन यंत्री सुरेश बैरागी और कंप्यूटर ऑपरेटर गोविंद माली के साथ मिलकर अपात्रों की लॉटरी लगा दी। यहां तक कि कलेक्ट्रेट में कार्यरत बाबुओं के परिजनों के भी बीपीएल कार्ड बना दिए गए।
एसडीएम की आईडी से हुआ फर्जीवाड़ा
फर्जीवाड़ा सिस्टम की डिजिटल सुरक्षा में बड़ी सेंध है। जिन परिवारों की आय 40 से 50 हजार रुपये है, उन्हें अति गरीब दिखाकर कार्ड जारी किए गए। इससे जिम्मेदारों पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। जब सरकारी तंत्र के भीतर बैठे लोग ही पासवर्ड साझा करने लगें, तो अपात्रों का शामिल होना आसान हो जाता है। अब भोपाल के सभी एसडीएम से पिछले एक साल का रिकॉर्ड मांगा गया है, जिससे कई और बड़े नाम सामने आने की आशंका है।
पूरे जिले में मचा हड़कंप
अपर कलेक्टर ने स्पष्ट कर दिया है कि अब जांच का दायरा केवल एमपी नगर तक सीमित नहीं रहेगा। भोपाल के सभी क्षेत्रों में पिछले एक साल में बने बीपीएल कार्डों की दोबारा स्क्रूटनी की जाएगी। जो भी अपात्र पाया जाएगा, न केवल उसका कार्ड निरस्त होगा, बल्कि उससे अब तक लिए गए राशन की वसूली भी की जा सकती है।