बीना विधायक का 'डबल गेम'! BJP के पट्टा पहनकर अब कोर्ट में विधायक निर्मला सप्रे का यू-टर्न, बोलीं—मैं तो कांग्रेसी हूँ!
भोपाल।
मध्य प्रदेश की राजनीति में एक दिलचस्प मोड़ सामने आया है। बीना से विधायक निर्मला सप्रे ने हाई कोर्ट में दावा किया है कि वे अब भी कांग्रेस पार्टी की सदस्य हैं। यह बयान उस समय सामने आया, जब उनके खिलाफ दलबदल से जुड़ी याचिका पर सुनवाई चल रही है। मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की खंडपीठ के समक्ष नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई हुई। इसी दौरान कोर्ट के सवाल पर सप्रे की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संजय अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि वे अभी भी कांग्रेस में ही हैं।
हाईकोर्ट की अगली सुनवाई 20 अप्रैल को
इस मामले में कोर्ट ने याचिकाकर्ता उमंग सिंघार को निर्देश दिया है कि वे 9 अप्रैल को विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष अपना पक्ष रखें। इसके बाद हाई कोर्ट में अगली सुनवाई 20 अप्रैल को निर्धारित की गई है। बता दें कि उमंग सिंघार ने सप्रे के खिलाफ याचिका दायर कर उनका निर्वाचन निरस्त करने की मांग की है। उनका आरोप है कि सप्रे भाजपा में शामिल हो चुकी हैं, लेकिन उन्होंने विधायक पद से इस्तीफा नहीं दिया, जो दलबदल कानून का उल्लंघन है।
90 दिनों में अध्यक्ष ने नहीं लिया निर्णय
याचिका के अनुसार, 30 जून 2024 को इस संबंध में विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष आवेदन दिया गया था, लेकिन तय 90 दिनों की समयसीमा में कोई निर्णय नहीं लिया गया। इसके बाद मामला हाई कोर्ट में पहुंचा। सप्रे पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का भी आरोप है। बताया गया है कि लोकसभा चुनाव के दौरान 5 मई 2024 को राहतगढ़ में आयोजित मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कार्यक्रम में वे मंच पर नजर आई थीं। उन्होंने भाजपा का पट्टा भी पहना था। वहीं, राज्य शासन की ओर से कोर्ट में यह दलील दी गई कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, जब तक विधानसभा अध्यक्ष किसी याचिका पर निर्णय नहीं लेते, तब तक हाई कोर्ट इस मामले में हस्तक्षेप नहीं कर सकता। याचिका पर फैसला लेना विधानसभा अध्यक्ष का विशेषाधिकार है। अब इस पूरे मामले पर सभी की नजरें विधानसभा अध्यक्ष के आगामी निर्णय और हाई कोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी हैं।

केरल विधानसभा चुनाव 2026: कांग्रेस ने पूरी ताकत झोंकी, राहुल गांधी ने डाला डेरा
पीएम मोदी का हमला, बोले—असम में भाजपा की हैट्रिक और राहुल की हार की सेंचुरी
असम चुनाव 2026: दोबारा मैदान में उतरे विधायकों की संपत्ति में 80% बढ़ोतरी