MP में प्रशासनिक अराजकता! क्या कानून से ऊपर हैं ACS अशोक वर्णवाल? NGT के आदेश को ठुकराने पर छिड़ा विवाद
भोपाल।
मध्य प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों 'पावर स्ट्रगल' और 'प्रशासनिक अराजकता' को लेकर बहस तेज हो गई है। ताजा विवाद राज्य के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी और पर्यावरण विभाग के अपर मुख्य सचिव (ACS) अशोक वर्णवाल द्वारा नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के आदेश को मानने से लिखित में इनकार करने के बाद खड़ा हुआ है।
क्या है पूरा मामला?
मध्य प्रदेश में पर्यावरणीय अनुमति (Environmental Clearance) देने के लिए भारत सरकार के गजट नोटिफिकेशन के तहत 'सिया' (SEIAA) का गठन किया गया है। नियम के मुताबिक, किसी भी खदान (रेत या पत्थर) या निर्माण एजेंसी को अनुमति देने से पहले सिया का असेसमेंट जरूरी है। विवाद तब शुरू हुआ जब 'सिया' के तत्कालीन सेक्रेटरी और तत्कालीन प्रमुख सचिव नवनीत कोठारी के कार्यकाल के दौरान, बिना 'सिया' की अनुमति के 237 अनुमतियाँ जारी कर दी गईं। यह मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। इसी बीच, NGT ने 3 फरवरी 2026 के अपने एक आदेश में इन अवैध अनुमतियों में से 9 को पूरी तरह रद्द कर दिया था और कड़ी टिप्पणी की थी।
ACS वर्णवाल का 'इनकार' और विवेक तंखा का हमला
हैरानी की बात यह है कि NGT के आदेश के 24 दिन बाद, 27 फरवरी को ACS अशोक वर्णवाल ने एक आदेश जारी कर कहा कि "राज्य सरकार निर्णय ले चुकी है कि ये 237 परमिशन उचित हैं।" उन्होंने तर्क दिया कि चूंकि मामला सुप्रीम कोर्ट में है और वहां से कोई स्थगन (Stay) नहीं मिला है, इसलिए NGT का आदेश प्रभावी नहीं माना जा रहा। इस मुद्दे पर देश के दिग्गज वकील और राज्यसभा सांसद विवेक तंखा ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को टैग करते हुए ट्वीट किया:
"सिया के चेयरमैन और ACS के बीच फिर तनाव। ACS ने NGT के आदेशों को मानने से इनकार कर दिया है। यह प्रशासनिक अनुशासनहीनता के साफ संकेत हैं।"
जेल और भारी जुर्माने का है प्रावधान
रिपोर्ट में भारत सरकार के गजट नोटिफिकेशन की धारा 26(1) का हवाला दिया गया है, जिसके तहत NGT के आदेश की अवहेलना करने पर गंभीर सजा के प्रावधान हैं:
3 साल तक का कारावास। 1 करोड़ रुपये से लेकर 10 करोड़ रुपये तक।
उल्लंघन जारी रहने पर 25,000 रुपये प्रतिदिन का जुर्माना।
बड़े सवाल:
- क्या कोई प्रशासनिक अधिकारी हाई कोर्ट के समकक्ष दर्जा रखने वाले ट्रिब्यूनल (NGT) के आदेश को राज्य सरकार के पुराने निर्णय का हवाला देकर खारिज कर सकता है?
- क्या एक आईएएस अधिकारी को बचाने के लिए पूरी व्यवस्था दांव पर लगाई जा रही है?
- क्या मुख्यमंत्री मोहन यादव इस 'प्रशासनिक अराजकता' पर एक्शन लेंगे?
- फिलहाल, इस मामले ने तूल पकड़ लिया है और कयास लगाए जा रहे हैं कि यह मामला जल्द ही सुप्रीम कोर्ट में एक नई कानूनी लड़ाई का रूप ले सकता है।

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