MP सरकार की 'पावर' के आगे पस्त हुई सोम डिस्टलरी! हाई कोर्ट के आदेश के बाद भी टेंडर से बाहर, लगा तगड़ा झटका
भोपाल।
अगर आपको शासन और प्रशासन की असली ताकत का अंदाजा लगाना है, तो वर्तमान में 'सोम डिस्टलरी' (Som Distillery) के हालात देख लीजिए। मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने नियमों का ऐसा चक्रव्यूह बुना कि देश-दुनिया के बड़े वकीलों की फौज भी इस दिग्गज शराब कंपनी को आबकारी टेंडर की प्रक्रिया से बाहर होने से नहीं बचा सकी।
हाई कोर्ट के 'डबल बेंच' का सहारा भी पड़ा फीका
सोम डिस्टलरी को जब आबकारी प्रक्रिया से बाहर किया गया, तो मामला हाई कोर्ट पहुंचा। सिंगल बेंच से राहत न मिलने पर कंपनी ने डबल बेंच का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान देश के दिग्गज वकील मुकुल रोहतगी ऑनलाइन पेश हुए और दलीलें दीं। कोर्ट ने आदेश दिया कि टेंडर की धारा 3(1)B के तहत सोम डिस्टलरी को प्रक्रिया में शामिल किया जाए। लेकिन असली 'खेल' इसके बाद शुरू हुआ।
नियमों की 'फांस' में फंसी कंपनी
हाई कोर्ट के आदेश पर सरकार ने सोम डिस्टलरी को टेंडर डालने की अनुमति तो दे दी, लेकिन नियमों की एक बारीक शर्त ने कंपनी के अरमानों पर पानी फेर दिया। टेंडर डालने वाली कंपनी के पास 'लाइव' यानी चालू डिस्टलरी होनी चाहिए। सोम डिस्टलरी की रायसेन स्थित यूनिट का लाइसेंस सरकार पहले ही निरस्त कर चुकी है। जब कंपनी ने टेंडर भरा, तो सरकार ने तकनीकी आधार पर उसे रिजेक्ट कर दिया। तर्क सीधा था—डिस्टलरी तो आपके पास है, लेकिन वह 'चलती हुई' (Live) नहीं है। इसी तकनीकी पेंच में फंसकर सोम डिस्टलरी को पूरी प्रक्रिया से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।
कड़क अधिकारी और सरकार के कड़े तेवर
माना जा रहा है कि पूर्व आबकारी आयुक्त अभिजीत अग्रवाल के समय कंपनी को जो 'संरक्षण' मिल रहा था, वह अब पूरी तरह खत्म हो चुका है। नए आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना अपनी सख्ती और नियमों की पक्की कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने कोर्ट के आदेश का पालन भी किया और नियमों के तहत कंपनी को बाहर भी कर दिया।
सोम डिस्टलरी के लिए बड़ा नुकसान
उत्तर भारत की सबसे बड़ी शराब कंपनियों में शुमार सोम डिस्टलरी के लिए अपने ही गृह राज्य (MP) में यह एक बहुत बड़ा व्यावसायिक और साख का झटका है। जिस तरह से सरकार ने इस दिग्गज ग्रुप को 'टांग' दिया है, वह पूरे प्रदेश के शराब सिंडिकेट के लिए एक बड़ा संदेश है।

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