भोपाल। 
मध्य प्रदेश में राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे को लेकर एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की ताजा रिपोर्ट ने बड़ा खुलासा किया है। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024-25 के दौरान प्रदेश में मिले कुल चुनावी चंदे का भारी हिस्सा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खाते में गया, जबकि कांग्रेस को बेहद कम राशि प्राप्त हुई। रिपोर्ट बताती है कि मध्य प्रदेश में राजनीतिक दलों को कुल करीब 55.779 करोड़ रुपये का चंदा मिला। इसमें से लगभग 97 प्रतिशत राशि भाजपा को प्राप्त हुई, जो करीब 54 करोड़ रुपये से अधिक है। इसके मुकाबले कांग्रेस को केवल करीब 2.5 प्रतिशत यानी लगभग 1.37 करोड़ रुपये ही मिल सके। वहीं, उत्तर प्रदेश भाजपा से तुलना करें तो 52.47 करोड़ रुपये चंदे के रूप में मिले। यानी मध्य प्रदेश भाजपा को उत्तर प्रदेश भाजपा से ज्यादा चंदा मिला। रिपोर्ट के मुताबिक, 20 हजार रुपये से अधिक के दान को शामिल किया गया है। वहीं, आम आदमी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी जैसे अन्य दलों को भी सीमित फंडिंग मिली। इन दलों के हिस्से में कुल चंदे का बहुत छोटा भाग ही आया, जिससे प्रदेश में फंडिंग का असंतुलन साफ नजर आता है।
कॉरपोरेट और बिजनेस हाउस का दबदबा
रिपोर्ट यह भी बताती है कि चंदे का बड़ा हिस्सा कॉर्पोरेट और कारोबारी घरानों से आया है। कुल राशि में से लगभग 38.48 करोड़ रुपये कंपनियों और व्यावसायिक संस्थानों द्वारा दिए गए हैं। प्रदेश में कॉरपोरेट और बिजनेस हाउस चुनावी चंदे के प्रमुख स्रोत बने हुए हैं। बड़ी कंपनियों और व्यापारिक समूहों ने सबसे ज्यादा योगदान दिया, जिससे राजनीतिक फंडिंग में उनकी भूमिका और प्रभाव बढ़ता दिख रहा है।
अन्य राज्यों के मुकाबले स्थिति
मध्य प्रदेश में मिलने वाला चंदा अन्य बड़े राज्यों जैसे दिल्ली, महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु और कर्नाटक की तुलना में कम है। इसके बावजूद प्रदेश की कुल राशि कुछ राज्यों से अधिक भी दर्ज की गई है, जो इसे राष्ट्रीय स्तर पर एक अहम स्थिति में रखती है।  एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रीय स्तर पर भी भाजपा को मिलने वाले चंदे में भारी बढ़ोतरी हुई है। पार्टी की फंडिंग में पिछले वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय उछाल दर्ज किया गया है, जिससे उसकी वित्तीय स्थिति अन्य दलों की तुलना में मजबूत बनी हुई है।