रिटायर्ड IAS अधिकारी को बिल्डर से मिली 'मौत' की धमकी; भोपाल पुलिस कमिश्नर से सुरक्षा की गुहार
भोपाल, सबकी खबर।
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ एक रिटायर्ड आईएएस (IAS) अधिकारी ने शहर के पुलिस कमिश्नर को पत्र लिखकर अपनी जान का खतरा बताया है। रिटायर्ड कमिश्नर और कलेक्टर रह चुके आर.बी. प्रजापति का आरोप है कि एक रसूखदार बिल्डर और उसके गुर्गे उन्हें लगातार धमका रहे हैं।
क्या है पूरा विवाद?
मामला अयोध्या बाईपास स्थित 'प्रीमियम ऑर्चर्ड' कॉलोनी से जुड़ा है, जिसे एस.वी. इंफ्रा डेवलपर (SV Infra Developer) ने विकसित किया है। इसके मालिक नितिन अग्रवाल हैं। रिटायर्ड IAS प्रजापति का आरोप है कि बिल्डर ने कॉलोनी में मूलभूत सुविधाएं पूरी किए बिना ही नगर निगम को हैंडओवर कर दिया। अब बिल्डर टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (T&CP) विभाग के साथ मिलकर कॉलोनी के मूल नक्शे में बदलाव (उपांतरण) करवाना चाहता है, ताकि खाली जगहों से नए प्लॉट निकाले जा सकें। प्रजापति ने नियमों का हवाला देते हुए 12 मार्च को इस अवैध परिवर्तन के खिलाफ टीएनसीपी में लिखित आपत्ति दर्ज कराई थी।
"मैं जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र बांटता हूँ"
प्रजापति के अनुसार, आपत्ति दर्ज कराने के बाद से ही उन्हें अलग-अलग नंबरों और WhatsApp कॉल के जरिए डराने-धमकाने का सिलसिला शुरू हो गया। "पहले उन्होंने मुझे प्रलोभन देने और सेटलमेंट करने की कोशिश की, जिसे मैंने ठुकरा दिया। अब मुझे धमकियां मिल रही हैं। एक फोन कॉल पर व्यक्ति ने कहा कि 'मैं वो आदमी हूँ जो जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र बांटता हूँ', यानी वह मुझे जान से मारने का सीधा संकेत दे रहा था।"
पुलिस कमिश्नर को सौंपा 2 पन्नों का शिकायती पत्र
आर.बी. प्रजापति ने भोपाल पुलिस कमिश्नर को दो पन्नों का एक विस्तृत शिकायती पत्र सौंपा है। इसमें उन्होंने उन सभी मोबाइल नंबरों, समय और तारीखों का उल्लेख किया है जिनसे उन्हें कॉल आए हैं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि बिल्डर नितिन अग्रवाल ने सीधे फोन नहीं किया है, लेकिन धमकी देने वाले लोग उन्हीं के नाम का इस्तेमाल कर रहे हैं।
कानून-व्यवस्था पर सवाल
यदि भोपाल में एक पूर्व कलेक्टर और कमिश्नर स्तर का अधिकारी सुरक्षित नहीं है और उसे अपनी सुरक्षा के लिए गुहार लगानी पड़ रही है, तो आम आदमी की स्थिति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। फिलहाल, पुलिस इस मामले की जांच कर रही है और यह देखना होगा कि भू-माफियाओं के इस तथाकथित 'खेल' पर प्रशासन क्या कार्रवाई करता है।

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