संकल्प होगा पूरा: राम मंदिर बनने के बाद पहली बार अयोध्या जाएंगे दिग्विजय सिंह; हनुमान गढ़ी के भी करेंगे दर्शन
भोपाल।
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह 26 मार्च को अयोध्या जा रहे हैं। राम मंदिर के निर्माण के बाद यह उनका पहला अयोध्या दौरा होगा। खास बात यह है कि सिंह ने मंदिर निर्माण के दौरान ही घोषणा की थी कि जब प्रभु श्री राम का भव्य मंदिर पूरी तरह बनकर तैयार हो जाएगा, वे तभी दर्शन करने जाएंगे। अब जबकि मंदिर का मुख्य निर्माण कार्य पूर्णता की ओर है, वे अपना संकल्प पूरा करने पहुंचेंगे।
दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर निर्माण के लिए 1 लाख 11 हजार 111 रुपए की निधि समर्पित की थी। उन्होंने हमेशा कहा कि वे राम भक्त हैं, लेकिन राजनीति और आस्था को अलग रखते हैं।
हाल ही में (19 मार्च 2026 को) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अयोध्या का दौरा किया। उन्होंने वहां 150 किलो का स्वर्ण जड़ित 'श्री राम यंत्र' स्थापित किया। नवरात्रि के पहले दिन राष्ट्रपति गुरुवार सुबह परिवार के साथ अयोध्या पहुंचीं। इससे पहले उन्होंने रामलला के दर्शन किए। दूसरे फ्लोर पर बने राम दरबार में श्रीराम यंत्र की स्थापना की। मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा के अनुसार, मुख्य मंदिर का निर्माण कार्य अब पूरा हो चुका है और अप्रैल अंत तक सभी तकनीकी औपचारिकताएं भी पूरी हो जाएंगी। राष्ट्रपति के इस दौरे को मंदिर की आध्यात्मिक पूर्णता के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
रामेश्वर शर्मा बोले- राम जिसके साथ, जीत उसी की
बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा जब राम मंदिर का भव्य प्राण प्रतिष्ठा समारोह आयोजित किया गया, तब देश के संत-महंत, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आरएसएस के परम पूज्य सरसंघचालक भी उसमें उपस्थित थे। कांग्रेस को भी आमंत्रित किया गया था, लेकिन वह शामिल नहीं हुई। दिग्विजय सिंह अगर उस प्राण प्रतिष्ठा समारोह में चले जाते, तो भी कांग्रेस उन्हें राज्यसभा नहीं भेजती। अब दिग्विजय सिंह यह महसूस कर चुके हैं कि राम अगर साथ हैं तो काम जरूर आता है। क्योंकि राम जिसके साथ होते हैं, जीत भी उसी की होती है। हमारे धर्म ग्रंथों में भी कहा गया है कि सत्य कभी पराजित नहीं होता। यदि यही बात देश की राजनीति पहले समझ लेती, तो अयोध्या का राम मंदिर कई वर्षों पहले बन जाता। दिग्विजय सिंह, जब आप रामलला के दर्शन करने जाएं, तो उन शहीदों को भी नमन करें जिन्होंने 1992 में गोलियां खाईं। जिन रामलला को आपकी पार्टी ने काल्पनिक कहा था, आज उनके दर्शन कर यह स्वीकार करें कि रामलला काल्पनिक नहीं, बल्कि यथार्थ हैं। रामलला के दर्शन ही जीवन का सार हैं। जो व्यक्ति इनके दर्शन से वंचित रहता है, उसका जीवन अधूरा है। रामलला के चरणों में पहुंचें, आगे का मार्ग वही बताएंगे।

संविधान निर्माता डॉ, बाबासाहेब का स्मारक बना राजनीतिक अखाड़ा
भारत-अमेरिका रिश्ते साझा हितों पर आधारित: कोल्बी
प्रदेश में हवाई सेवा विस्तार का बड़ा फैसला, 11 जिलों को मिलेगा फायदा
भारी विरोध के बीच गुजरात में UCC विधेयक पेश, लिव-इन और दो शादियों पर नए नियम