भोपाल।
राजधानी की फिजाओं में घुला जहर एक बार फिर लोगों की सांसों पर भारी पड़ रहा है। 20 मार्च को हुई तेज हवाओं और बौछारों ने जिस प्रदूषण को जमीन पर बिठा दिया था, मौसम साफ होते ही उसने दोगुनी रफ्तार से वापसी की है। पिछले 72 घंटों के भीतर राजधानी का एयर क्वालिटी इंडेक्स 104 से उछलकर 159 पर पहुंच गया है। सबसे बुरा हाल टीटी नगर इलाके का है, जहां प्रदूषण का स्तर सबसे ज्यादा दर्ज किया गया।
बारिश का क्लीनिंग इफेक्ट हुआ फेल
विशेषज्ञों के मुताबिक, बारिश के दौरान धूल के कण भारी होकर जमीन पर जम जाते हैं और सड़कों पर गाड़ियों के टायर भी धूल नहीं उड़ा पाते। लेकिन जैसे ही सडकें सूखीं, धूल के गुबार फिर से हवा में तैरने लगे हैं। भोपाल की सडकों की जर्जर हालत और जगह-जगह चल रहे निर्माण कार्यों ने इस आग में घी डालने का काम किया है।
सल्फर डाइऑक्साइड और PM 2.5 का डबल अटैक
शहर की हवा की गुणवत्ता मापने के लिए सल्फर डाइऑक्साइड (SO2), नाइट्रोजन ऑक्साइड (Nox), और RSPM10 जैसे मानकों का सहारा लिया जाता है। इनमें सबसे खतरनाक PM 2.5 है, जो सीधे फेफड़ों को निशाना बनाता है। निर्माण कार्यों से निकलने वाला PM 10 और मानवीय गतिविधियों से पैदा हुआ PM 2.5 अब भोपाल के लोगों के लिए साइलेंट किलर साबित हो रहा है।
क्या कह रहे अधिकारी
अधिकारियों का कहना है कि बारिश प्रदूषण कम करने में कुदरती वरदान की तरह काम करती है, लेकिन सडकों पर उड़ती धूल और बढ़ते कंस्ट्रक्शन के कारण यह राहत ज्यादा देर नहीं टिकती। वर्तमान में AQI 'Moderate' कैटेगरी में है, जो फेफड़ों और दिल के मरीजों के लिए जोखिम भरा है।