भोपाल। 
राजधानी भोपाल में 26 टन गौ-मांस की बरामदगी ने मध्य प्रदेश की राजनीति में बड़ा भूचाल ला दिया है।  लगभग 650 से ज्यादा गायों के इस सामूहिक वध के मुख्य आरोपी असलम चमड़ा को मिली जमानत ने अब भाजपा के ही कद्दावर नेताओं और हिंदूवादी संगठनों के सब्र का बांध तोड़ दिया है। पूर्व विधायक ध्रुव नारायण सिंह ने पुलिस और प्रशासन को सीधे कटघरे में खड़ा करते हुए सनसनीखेज आरोप लगाया है कि पुलिस ने जानबूझकर केस को कमजोर बनाया ताकि आरोपी को जमानत मिल सके। सिंह का मानना है कि नगर निगम के भ्रष्ट अधिकारियों और कुछ रसूखदार नेताओं के संरक्षण के बिना इतना बड़ा रैकट चलना नामुमकिन है। इसी आक्रोश के बीच भाजपा के तेजतर्रार नेता कृष्णा घाडगे ने सबकी खबर को बताया कि असलम चमड़ा जहाँ भी मिलेगा, वे उसे जूते से मारेंगे। घाडगे ने खुलासा किया कि मृत पशु उठाने के ठेके की आड़ में जीवित गायों का कत्लेआम कर मांस बाहर भेजा जा रहा था।
असलम पर रासुका 
हालांकि, बढ़ते दबाव के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश पर असलम पर एनएसए (NSA) लगाकर उसे दोबारा जेल भेज दिया गया है, लेकिन सवाल अभी भी वही है— वो 'बड़े चेहरे' कौन हैं जो पर्दे के पीछे से असलम को फंडिंग और सुरक्षा दे रहे थे? हिंदूवादी संगठनों ने साफ कर दिया है कि जब तक पूरे सिंडिकेट को ध्वस्त नहीं किया जाता, यह लड़ाई जारी रहेगी।