मध्य प्रदेश स्वास्थ्य विभाग में बड़ा पैथोलॉजी घोटाला: ₹100 की जांच ₹18 में करने का टेंडर, जनता की सेहत के साथ बड़ा खिलवाड़
भोपाल।
मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य विभाग में सरकारी अस्पतालों की पैथोलॉजी जांच के टेंडर को लेकर एक बहुत बड़ा खुलासा हुआ है, जो प्रदेश की 9 करोड़ जनता की सेहत से सीधा जुड़ा है। सबकी खबर की रिपोर्ट के मुताबिक, नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) के तहत अगले 5 साल के लिए पैथोलॉजी जांच का जो नया टेंडर हुआ है, उसमें भारी अनियमितताएं सामने आई हैं। साल 2019 में जो काम भारत सरकार की निर्धारित दरों से 31% कम पर दिया गया था, वही काम अब 2026 के टेंडर में 'साइंस हाउस' नामक कंपनी को 81.2% माइनस रेट पर दिया जा रहा है। इसका सीधा मतलब यह है कि जिस जांच के लिए केंद्र सरकार ने ₹100 का मानक तय किया है, वह जांच यह कंपनी मात्र ₹18.80 में करने का दावा कर रही है। यह आंकड़ा इसलिए चौंकाने वाला है क्योंकि पिछले 6-7 वर्षों में लैब में इस्तेमाल होने वाली मशीनों, केमिकल और स्टाफ की सैलरी में लगभग दोगुनी बढ़ोतरी हुई है, फिर भी जांच की दरें इतनी नीचे गिर गई हैं।
2025 में इनकम टैक्स की छापेमारी में हुए थे बडे खुलासे...
हैरानी की बात यह है कि साइंस हाउस कंपनी पहले से ही विवादों में रही है और 2025 में इनकम टैक्स के छापों के दौरान इस पर फर्जी बिलिंग और नियमों के उल्लंघन के गंभीर आरोप लगे थे। इसके बावजूद, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने उसे ब्लैकलिस्ट करने के बजाय दोबारा एल-1 (L1) घोषित कर दिया है। भारत सरकार के जनरल फाइनेंशियल रूल्स (GFR) के मुताबिक, यदि कोई बोली इतनी कम (Abnormally Low) हो कि काम की गुणवत्ता प्रभावित होने का डर हो, तो सरकार को एक विशेष कमेटी बनाकर उसकी जांच करनी चाहिए, लेकिन यहाँ नियमों को ताक पर रखकर 'नोटिफिकेशन ऑफ अवार्ड' जारी करने की तैयारी है। अब सवाल यह है कि क्या ₹18 में होने वाली पैथोलॉजी जांच में सही केमिकल और प्रशिक्षित स्टाफ का उपयोग होगा? क्या यह सीधे तौर पर मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ नहीं है? इस पूरे मामले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से तत्काल संज्ञान लेने की मांग की गई है, क्योंकि यह न केवल सरकारी खजाने की लूट बल्कि जनता के स्वास्थ्य से जुड़ा एक गंभीर घोटाला प्रतीत होता है।

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