राज्यसभा चुनाव: क्रॉस वोटिंग के खौफ ने बढ़ाई MP कांग्रेस की धड़कनें, क्या दिग्विजय की विरासत बचा पाएगी पार्टी?
भोपाल।
देश के दूसरे राज्यों में राज्यसभा सीट को लेकर क्रास वोटिंग की घटना ने मध्य प्रदेश की सियासत में हलचल तेज कर दी है। मध्यप्रदेश में तीन में से दो सीटों पर भाजपा की स्थिति मजबूत मानी जा रही है, जबकि तीसरी सीट पर मुकाबला दिलचस्प होने की संभावना है। यह सीट फिलहाल कांग्रेस के पास है, लेकिन पार्टी के सामने इसे बरकरार रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। हाल ही में बिहार, हरियाणा और ओडिशा में राज्यसभा (RS) चुनाव के दौरान कांग्रेस विधायकों की क्रॉस वोटिंग की घटनाओं ने मध्यप्रदेश कांग्रेस की चिंता बढ़ा दी है। आगामी राज्यसभा चुनाव में प्रदेश की तीन सीटों पर मतदान होना है, ऐसे में पार्टी के भीतर सतर्कता बढ़ गई है। बिहार में मतदान के दौरान कांग्रेस के तीन विधायक अनुपस्थित रहे, जबकि हरियाणा और ओडिशा में कुछ विधायकों ने विरोधी दल के उम्मीदवारों के पक्ष में वोट किया। इन घटनाओं ने कांग्रेस नेतृत्व को अलर्ट कर दिया है, खासकर मध्यप्रदेश में होने वाले चुनाव को लेकर। वर्तमान में तीन में से दो सीटों पर अभी भाजपा से डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी और जॉर्ज कुरियन सांसद हैं। तीसरी सीट कांग्रेस के पास है, जिस पर दिग्विजय सिंह सांसद है। बता दें दिग्विजय सिंह पहले ही साफ कर चुके है कि वह दोबारा राज्यसभा जाने के इच्छुक नहीं है। ऐसे में तीसरी सीट पर मुकाबला दिलचस्प होने की संभावना है।
मध्यप्रदेश में क्या है गणित?
मध्य प्रदेश में विधानसभा की कुल 230 सीटें हैं। अभी तीन राज्य सभा सीटे खाली होने वाली हैं। एक सीट जीतने के लिए 58 वोट जरूरी हैं। भाजपा के पास अभी 164 विधायक हैं। इस गणित पर भाजपा दो सीटें आसानी से जीत सकती है। वहीं, कांग्रेस के पास फिलहाल 65 विधायक हैं, जो घटकर 63 तक पहुंच सकते हैं।
तीसरी सीट पर टिकी नजर
तीसरी सीट को लेकर मुकाबला दिलचस्प होने की संभावना है। अगर भाजपा तीसरी सीट जीतना चाहती है, तो उसे कम से कम 8 विधायकों की क्रॉस वोटिंग या अतिरिक्त समर्थन की जरूरत पड़ेगी। वहीं, कांग्रेस को आशंका है कि यदि क्रॉस वोटिंग होती है या भाजपा अतिरिक्त उम्मीदवार उतारती है, तो उसका गणित बिगड़ सकता है।

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