एमपी हाईकोर्ट का कड़ा रुख: सड़क हादसों में जान गंवाने वालों पर स्वतः संज्ञान
भोपाल।
मध्यप्रदेश में लगातार बढ़ रही सड़क दुर्घटनाओं और हर दिन हो रही मौतों के मामले को लेकर हाईकोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया है। हाईकोर्ट में दायर एक याचिका में बताया गया है कि प्रदेश में सड़क हादसों में प्रतिदिन औसतन 41 लोगों की मौत हो जाती है। मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की युगलपीठ ने केंद्र और राज्य सरकार सहित संबंधित विभागों को नोटिस जारी किया है और मामले में कोर्ट मित्र भी नियुक्त किया है।
चीफ जस्टिस की युगलपीठ ने जारी किए नोटिस
मामले की सुनवाई हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने की। याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने अनुवेदकों को नोटिस जारी करते हुए मामले में कोर्ट मित्र की नियुक्ति भी कर दी है।
याचिका में सड़क हादसों के गंभीर आंकड़ों का हवाला
जबलपुर निवासी आशीष शिवहरे की ओर से यह याचिका दायर की गई है। याचिका में लोकसभा में वर्ष 2022 में सड़क दुर्घटनाओं को लेकर सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट का हवाला दिया गया है। इसमें बताया गया है कि देश में सड़क दुर्घटनाओं में हर दिन साढ़े तीन सौ से अधिक लोगों की मौत होती है, जबकि मध्यप्रदेश में यह संख्या लगभग 41 प्रतिदिन है।
सिर्फ चालक की गलती नहीं, कई कारण जिम्मेदार
याचिका में कहा गया है कि सड़क दुर्घटनाओं के लिए केवल चालक की गलती को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है। खराब सड़क इंजीनियरिंग, खतरनाक गड्ढे, अवैध अतिक्रमण और बिना उचित प्रशिक्षण के जारी किए गए ड्राइविंग लाइसेंस भी दुर्घटनाओं के बड़े कारण हैं।
हेलमेट लॉकर और रोड सेफ्टी ऐप की मांग
याचिका में अदालत से कई महत्वपूर्ण निर्देश देने की मांग की गई है। इसमें कहा गया है कि दोपहिया वाहनों में हेलमेट चोरी की समस्या से बचने और सुरक्षा नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए इन-बिल्ट हेलमेट लॉकर अनिवार्य किए जाएं। इसके साथ ही एक ऐसा रोड सेफ्टी ऐप बनाया जाए, जहां आम लोग खतरनाक सड़कों, ब्लैक स्पॉट्स और गड्ढों की फोटो के साथ सीधे शिकायत दर्ज करा सकें और उस पर वैज्ञानिक जांच हो।
हाईवे पर अवैध पार्किंग और शराब बिक्री पर कार्रवाई की मांग
याचिका में यह भी मांग की गई है कि हाईवे पर ढाबों के पास होने वाली अवैध पार्किंग, शराब की बिक्री और आवारा पशुओं के कारण होने वाली दुर्घटनाओं के लिए स्थानीय थाना प्रभारी और प्रशासन की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की जाए। याचिका में यह भी कहा गया है कि पुलिस और नगरीय प्रशासन की एकीकृत जवाबदेही तय की जाए। साथ ही इंजीनियरों और ठेकेदारों पर मोटर वाहन अधिनियम की धारा 198 का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए। यदि खराब सड़क डिजाइन या गड्ढों के कारण किसी व्यक्ति की जान जाती है तो संबंधित इंजीनियरों और ठेकेदारों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाए।
खराब सड़कों पर टोल वसूली रोकने की मांग
याचिका में यह भी कहा गया है कि खराब सड़कों पर टोल वसूली को तत्काल प्रभाव से रोका जाए। इसके अलावा ड्राइविंग लाइसेंस व्यवस्था में सुधार करते हुए सभी मौजूदा लाइसेंस धारकों को एक डिजिटल री-ट्रेनिंग ऐप के माध्यम से ट्रैफिक नियमों की जानकारी दी जाए। हाईकोर्ट की युगलपीठ ने मामले को गंभीर मानते हुए केंद्र और राज्य सरकार सहित नौ विभागों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। साथ ही वरिष्ठ अधिवक्ता अरिहंत तिवारी को कोर्ट मित्र नियुक्त किया गया है। इस मामले की अगली सुनवाई 27 अप्रैल को निर्धारित की गई है।

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