भोपाल।
मुख्यमंत्री मोहन यादव के विजयराघवगढ़ दौरे से ठीक पहले प्रदेश की सियासत में भूचाल आ गया है। पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने एक बेहद आक्रामक पत्र जारी कर विधायक संजय पाठक के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पटवारी ने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री से पूछा है कि क्या उनकी सरकार एक रसूखदार विधायक को 'राजनीतिक संरक्षण' दे रही है? 
443 करोड़ की वसूली कब? 
विधानसभा में सरकार खुद मान चुकी है कि संजय पाठक की कंपनियों पर 443 करोड़ की रिकवरी बकाया है। पटवारी ने पूछा- "अब तक नोटिस क्यों नहीं जारी हुआ? क्या खजाना भरने का इरादा नहीं है?" आरोप तो यह है कि गरीबों और आदिवासियों के नाम पर 1143 एकड़ जमीन हड़पी गई है। कांग्रेस ने मांग की है कि इस 'बेनामी' साम्राज्य पर बुलडोजर कब चलेगा? पटवारी ने दावा किया कि सहारा के गरीब निवेशकों के पैसे से विधायक के करीबियों ने जमीन खरीदी। उन्होंने पूछा- "क्या विधायक के परिवार पर FIR करने का दम है सरकार में?" कटनी नगर सुधार न्यास की योजना-15 की जमीन, जो 311 परिवारों को मिलनी थी, उस पर अवैध कब्जे का आरोप है। जनता पूछ रही है- "गरीबों का हक कब लौटाया जाएगा?" वहीं एक अदालती फैसले का हवाला देते हुए पटवारी ने कहा कि विधायक ने जज पर दबाव बनाया। उन्होंने मुख्यमंत्री से पूछा कि क्या आपकी सरकार न्यायपालिका का अपमान बर्दाश्त करेगी?
"विजयराघवगढ़ में मौन तोड़ें मुख्यमंत्री"
जीतू पटवारी ने साफ शब्दों में कहा है कि 14 मार्च को जब मुख्यमंत्री संजय पाठक के गढ़ (विजयराघवगढ़) में कदम रखेंगे, तो उन्हें इन भ्रष्टाचार के आरोपों पर जवाब देना ही होगा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर कार्रवाई नहीं होती, तो यह साफ है कि प्रदेश में 'भ्रष्टाचार के साथ समझौता' चल रहा है। 
लोकतंत्र में कोई भी संविधान से ऊपर नहीं है। अगर आरोप सच हैं, तो मुख्यमंत्री जी निष्पक्ष कार्रवाई का साहस दिखाएं, वरना जनता समझ जाएगी कि दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है।" 
— जीतू पटवारी, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष