सतना। 
अपने बेबाक और कभी-कभार विवादित बयानों के लिए सुर्खियों में रहने वाले प्रदेश सरकार के कद्दावर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय इन दिनों एक अलग ही अवतार में नजर आ रहे हैं। 'औकात' और 'घंटा' जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर चर्चा बटोरने वाले विजयवर्गीय अब भाजपा कार्यकर्ताओं को 'शिष्टाचार' और 'शालीनता' की नसीहत दे रहे हैं।
"कॉलर खड़ी न करें, विनम्र बनें"
सतना दौरे पर पहुंचे विजयवर्गीय ने जिला भाजपा की नई कार्यकारिणी के पदाधिकारियों के साथ बैठक की। इस दौरान उन्होंने कार्यकर्ताओं को जमीन से जुड़े रहने की सलाह देते हुए कहा:"जब हमें जिम्मेदारी मिलती है, तो हमें अपनी कॉलर खड़ी नहीं करनी चाहिए। हमें और अधिक विनम्र बनना है और शालीनता के साथ जनता के काम करने हैं।"
अधिकारियों से न भिड़ें, हमें बताएं
सत्ता के जोश में अक्सर कार्यकर्ताओं और अधिकारियों के बीच होने वाले टकराव पर भी मंत्री जी ने स्पष्ट रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि सरकार अपनी है, इसलिए अधिकारियों से जबरदस्ती उलझने या भिड़ने की जरूरत नहीं है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अगर कोई अधिकारी जनहित की बात नहीं सुनता, तो सीधे उन्हें जानकारी दें, वे खुद उनसे बात करेंगे।
हृदय परिवर्तन या अनुशासन का असर?
विजयवर्गीय के इन "मधुर वचनों" को सुनकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है। लोग हैरान हैं कि हमेशा आक्रामक तेवर दिखाने वाले नेता के सुर अचानक इतने नरम कैसे हो गए? क्या यह संगठन की तरफ से मिली किसी नसीहत का परिणाम है? क्या मंत्री जी का यह 'विनम्र अवतार' जमीन पर कार्यकर्ताओं के व्यवहार में बदलाव ला पाएगा? वजह जो भी हो, लेकिन कैलाश विजयवर्गीय का यह बदला हुआ अंदाज फिलहाल पूरी प्रदेश की राजनीति में चर्चा का केंद्र बना हुआ है।