भोपाल।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की भोपाल बेंच ने अपर लेक के पास भदभदा क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि NGT का काम पर्यावरण से जुड़े मुद्दों को सुलझाना है, न कि ज़मीन के मालिकाना हक और अधिकारों पर फैसला देना। यह टिप्पणी भोपाल नगर निगम (BMC) के वकील गुंजन चौक्सी द्वारा दायर एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) के बाद आई।
स्थानीय लोगों के विरोध के कारण रुकी कार्रवाई
रिपोर्ट में बताया गया कि 35 अतिक्रमणों में से 9 हटा दिए गए हैं, लेकिन बाकी को हटाने में स्थानीय लोगों के विरोध के कारण कार्रवाई रुकी हुई है। कुछ मामलों में, जमीन पर अधिकार को लेकर मामला सक्षम अदालतों में लंबित है। भोज वेटलैंड एक अंतरराष्ट्रीय महत्व का रामसर स्थल है और भोपाल के लोग पानी के लिए इस पर निर्भर हैं। यह जलवायु परिवर्तन के खिलाफ एक सुरक्षा कवच का काम करता है और शहर की आर्थिक ज़रूरतों को पूरा करते हुए जैव विविधता का संरक्षण करता है, इसलिए यह जरूरी है कि वेटलैंड अतिक्रमण या नुकसान के खतरे में न हो।
बीएमसी को दो हफ्तों में रिपोर्ट जमा करने के निर्देश
न्यायिक सदस्य जस्टिस शिव कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ ने कहा कि ज़मीन पर अधिकार और मालिकाना हक का फैसला राजस्व अदालतों को करना है। NGT की चिंता इस मामले में भोज वेटलैंड की सुरक्षा को लेकर है। NGT ने BMC को दो हफ़्तों के भीतर एक और एक्शन टेकन रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया है।
2021 में दायर की थी याचिका
याचिकाकर्ता आर्या श्रीवास्तव के वकील धर्मवीर शर्मा ने तर्क दिया कि NGT पहले ही कह चुका है कि संबंधित पक्षों को अपनी जमीन पर अधिकार और मालिकाना हक़ तय कराने के लिए राजस्व अदालतों का रुख करना चाहिए। आर्या श्रीवास्तव ने यह याचिका 2021 में तब दायर की थी जब वह नेशनल लॉ इंस्टीट्यूट यूनिवर्सिटी (NLIU) की छात्रा थीं।
7 अप्रैल को अगली सुनवाई
राज्य सरकार के वकील प्रशांत एम हरने और BMC की वकील गुंजन चौक्सी ने बताया कि उल्लंघन करने वाले या अतिक्रमणकार मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में कई रिट याचिकाओं के साथ पहुंचे थे, लेकिन उन्हें खारिज कर दिया गया और राजस्व अधिकारियों के सामने अपने अधिकार और मालिकाना हक़ तय कराने के लिए दस्तावेज़ पेश करने का अवसर दिया गया। NGT ने मामले की अगली सुनवाई 7 अप्रैल को तय की है।