भोपाल। 
जीतू पटवारी और जयवर्धन सिंह की जुगलबंदी एक बार फिर सुर्खियों में रही। मंच पर गर्मजोशी, नारों की गूंज और हल्के-फुल्के तंज—सबने मिलकर सियासी माहौल को रंगीन बना दिया। जैसे ही जीतू पटवारी गाड़ी से उतरे, जयवर्धन सिंह ‘जय हो बॉस की’ कहते हुए आगे बढ़े और माला पहनाकर स्वागत किया। इसके बाद ‘जीतू पटवारी जिंदाबाद’ के नारे लगे। माहौल ऐसा बना मानो पार्टी कार्यकर्ताओं को एकजुटता का लाइव संदेश दिया जा रहा हो। जवाब में पटवारी भी पीछे नहीं रहे। मुस्कुराते हुए बोले—“मैंने दूर से देखा कि कौन है। मैंने कहा, ये अपना हॉलीवुड का हीरो कौन खड़ा है? फिर देखा तो ये जेवी भैया हैं।” इतना सुनते ही मंच पर मौजूद नेता और कार्यकर्ता ठहाकों से गूंज उठे। सियासी गलियारों में इसे सिर्फ हल्की-फुल्की नोकझोंक नहीं, बल्कि रणनीतिक कैमिस्ट्री माना जा रहा है। कांग्रेस के भीतर ताकत और तालमेल का संदेश देना हो, तो ऐसे सार्वजनिक क्षण बहुत कुछ कह जाते हैं। खरी बात यह है कि दोनों नेता एक-दूसरे की अहमियत समझते हैं—और राजनीति में तारीफ भी अक्सर एक सोची-समझी चाल होती है। मंच की मुस्कान के पीछे संगठनात्मक संदेश साफ था: साथ हैं, मजबूत हैं, और मैदान में तैयार हैं।