डीएफओ विपिन पटेल ने इस्तीफा वापस लिया:वन विभाग को चिट्ठी लिखकर कहा- मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी, 4 फरवरी को किया था रिजाइन
भोपाल।
जबलपुर में डीएफओ योजना के पद पर पदस्थ एमपी कैडर के 2013 बैच के आईएफएस अधिकारी विपिन पटेल ने आखिरकार अपना इस्तीफा वापस ले लिया है। उनके इस्तीफा देने के बाद धर्मपत्नी ने पीसीसीएफ एंड हॉफ को आवेदन देकर इस्तीफा न मंजूर करने का आग्रह किया था और कहा था कि पति विपिन पटेल की मानसिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण उन्होंने इस्तीफा दिया है। विपिन पटेल की पत्नी के आवेदन के बाद पीसीसीएफ एंड हॉफ ने विपिन पटेल से तीन दिन में स्पष्टीकरण मांगा था जिसके बाद पटेल ने इस्तीफा वापस लेने की बात कही है। रीवा, दमोह, सतना और अनूपपुर के डीएफओ रह चुके पटेल ने इस्तीफा देने की वजह निजी कारण बताया था। 4 फरवरी को पीसीसीएफ और हॉफ को भेजे इस्तीफे में विपिन पटेल ने कहा था कि वे अपनी आईएफएस सर्विस से अनकंडीशनल इस्तीफा दे रहे हैं, जिसकी वजह निजी है। इस्तीफे में पटेल ने कहा था कि उनका इस्तीफा कांपीटेंट अथॉरिटी को फॉरवर्ड करें और आईएफएस सेवा से उन्हें मुक्त किया जाए। पटेल ने इस्तीफे की कॉपी वन विभाग के सचिव को भी भेजी थी।
इस्तीफा वापसी का पत्र वन विभाग को दिया
भारतीय वन सेवा के अधिकारी विपिन कुमार पटेल का इस्तीफा वापसी से संबंधित पत्र वन विभाग को मिल गया है। पत्र में पटेल ने लिखा है कि जल्दबाजी में उन्होंने यह कदम उठा लिया था और उनकी मानसिक स्थिति उस समय ठीक नहीं थी। वर्तमान में पटेल डीएफओ वर्किंग प्लान जबलपुर में पदस्थ हैं। वन विभाग ने पत्नी के पत्र के आधार पर पटेल से ई-मेल के जरिए स्पष्टीकरण मांगा था और कहा था कि वे तीन दिन के भीतर स्थिति स्पष्ट करें अन्यथा उनके त्यागपत्र पर एकपक्षीय निर्णय लेकर उसे स्वीकार कर लिया जाएगा।
सागर में लोकायुक्त में शिकायत, सतना, अनूपपुर में विवादित रहे
आईएफएस अधिकारी विपिन पटेल सतना, अनूपपुर में विवादित रहे थे। उनके विरुद्ध सागर लोकायुक्त पुलिस में भी शिकायत की गई थी। पटेल ने अनूपपुर डीएफओ रहने के दौरान एक विवादित आदेश जारी किया था। जिसका प्रदेश भर में विरोध हुआ था। उनके द्वारा जारी आदेश में कहा गया था उनके क्षेत्राधिकार में वनकर्मियों को उच्च पदभार दिए गए हैं, उसे तत्काल निरस्त कर दिया गया है। आदेश में यह भी लिखा था कि सभी स्टाफ कर्मी मूल पद पर वापस आकर काम करेंगे। डीएफओ विपिन पटेल द्वारा 4 नवंबर को आदेश दिया गया था। इसके बाद मप्र कर्मचारी मंच ने सीएम को पत्र लिखकर इसका विरोध जताया था।
दरअसल 15 अक्टूबर को वन विभाग ने आदेश जारी किया था कि 2025 के पदोन्नति आदेश लागू होने की वजह से कर्मचारी मूल पद पर लौटेंगे। इसलिए अब नए कर्मचारियों को उच्च पदभार दिया गया तो इससे प्रमोशन के मामलों में जटिलताएं आएंगी। इसलिए शासन उच्च पदभार वाले पूर्व के निर्देश रद्द करता है। इस पर कर्मचारी मंच के प्रदेश अध्यक्ष अशोक पांडे ने कहा था कि किसी वन मंडल ने ऐसा आदेश नहीं दिया है। अनूपपुर डीएफओ भी इसके लिए अधिकृत नहीं हैं। ऐसे आदेश का अधिकार सिर्फ सीसीएफ शहडोल को ही है। उन्होंने आरोप लगाया कि डीएफओ सागर और सतना में रहते हुए भी विवादों में रहे थे। सागर में शिकायत के बाद लोकायुक्त में जांच लंबित है।

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