भोपाल।
मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार में संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की भूमिका को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। बीजेपी विधानसभा में मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) के पद को भरने की तैयारी में है, जिसे सदन की कार्यवाही के सुचारू संचालन और दलीय अनुशासन के लिहाज से बेहद अहम माना जाता है। खास बात यह है कि इस पद के साथ कैबिनेट मंत्री का दर्जा भी दिया जाएगा।
फिलहाल सदन के भीतर फ्लोर मैनेजमेंट की पूरी जिम्मेदारी संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के पास है। लेकिन पार्टी सूत्रों के मुताबिक, इंदौर के भागीरथपुरा दूषित जलकांड के बाद से विजयवर्गीय सत्ता और संगठन के कामों में अपेक्षित सक्रियता नहीं दिखा रहे हैं। ऐसे में 16 फरवरी से शुरू होने वाले बजट सत्र के दौरान यदि उन्होंने रुचि नहीं ली, तो विपक्ष को सरकार पर हमला करने का मौका मिल सकता है।
जिम्मेदारी बांटने की कवायद
बीजेपी अब मुख्य सचेतक की नियुक्ति कर विजयवर्गीय के कार्यभार को बांटने की रणनीति पर काम कर रही है, ताकि सदन में सरकार का पक्ष और मजबूती से रखा जा सके।
इन नामों पर चर्चा
सूत्रों के अनुसार, इस अहम पद के लिए पार्टी के वरिष्ठ और अनुभवी विधायकों के नामों पर विचार चल रहा है।

  1. पूर्व विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीतासरन शर्मा
  2. पूर्व मंत्री अजय विश्नोई

हालांकि अजय विश्नोई का नाम विधायक दल के कोषाध्यक्ष पद के लिए भी चर्चा में है। ये दोनों ही नेता लंबे संसदीय अनुभव रखते हैं, लेकिन डॉ. मोहन यादव के मंत्रिमंडल में इन्हें जगह नहीं मिल सकी थी। अब मुख्य सचेतक की जिम्मेदारी देकर इन्हें सरकार में अहम भूमिका देने की योजना है।
सीएम और प्रदेश अध्यक्ष लेंगे अंतिम फैसला
पार्टी सूत्रों का कहना है कि इस नियुक्ति पर अंतिम मुहर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और बीजेपी के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के बीच विचार-विमर्श के बाद लगेगी। अब देखना दिलचस्प होगा कि मुख्य सचेतक की नियुक्ति केवल प्रशासनिक संतुलन का कदम साबित होती है या फिर इसे कैलाश विजयवर्गीय के सियासी कद में कटौती के संकेत के तौर पर देखा जाता है।