भोपाल।
विधानसभा नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने एसआईआर के बाद जारी वोटर लिस्ट में सिस्टम से हुई गड़बड़ियों को लेकर चिंता जताई है. इस संबंध में उन्होंने निर्वाचन आयोग को एक पत्र भी लिखा है. इस पत्र में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने एसआईआर के तय प्रारुप में मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद प्रदेश के तकरीबन सभी जिलों में मतदाताओं के नाम ऐसी गड़बड़ी वाली सूचियों में शामिल कर दिए गए.सिंघार ने पांच मांगे भी रखी हैं. जिसमें खास तौर पर ये कहा गया है कि आम जनता से पारदर्शी संवाद स्थापित कर यह भरोसा दिलाया जाना चाहिए कि विधिवत नोटिस, मैदानी सत्यापन और सुनवाई के बिना किसी भी मतदाता का नाम नहीं हटाया जाएगा. जो इस समय मतदाताओं में सबसे बड़ा डर है.
मतदाताओं में इसलिए है भ्रम और भय की स्थिति
नेता प्रतिपक्ष ने निर्वाचन आयोग को लिखे पत्र में कहा है कि एसआईआर के तहत मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद प्रदेश के तकरीबन सभी जिलों में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम ऐसी गड़बड़ी वाली सूचियों में शामिल कर गिए गए हैं.
उमंग सिंघार ने बताया कि "इन सूचियों में पिता के नाम में गड़बड़ी है. माता-पिता और मतदाता की उम्र का अंतर कहीं पचास बरस से ज्यादा है कहीं पंद्रह वर्ष से भी कम है. इसके अलावा दादा-नाना की उम्र में भी चालीस साल से भी कम उम्र का अंतर है. ये डेटा आधारित गड़बड़ियां हैं लेकिन इनसे लाखों की तादाद में मतदाता प्रभावित हो रहे हैं और मतदाताओं में भय और भ्रम की स्थिति बन रही है."
नेता प्रतिपक्ष ने चुनाव आयोग से रखी ये पांच मांगें
उमंग सिंघार ने इस पत्र में चुनाव आयोग के सामने पांच मांगे रखी हैं. जिसमें उन्होनें कहा है कि सबसे बड़ी जरुरत इस बात की है कि किसी भी मतदाता का नाम ना हटाया जाए. सिंघार ने पांच मांगे रखी हैं.

  • 1. सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों और बीएलओ को लिखित रुप में ये स्पष्ट निर्देश दिए जाएं कि एसआईआर के अंतर्गत प्रणालीगत विसगंतिया केवल सत्यापन बताती हैं. इसके आधार पर दस्तावेज मांगना या नाम हटाना ठीक नहीं है.
  • 2. दूसरा जो गड़बड़ियां हैं उनके सुधार के लिए सत्यापन के लिए सरल और ऐसी प्रक्रिया तय की जाए जो पूरी तरह मशीनी ना हो कर मनुष्य से संचालित हों.
  • 3. बीएलओ और पर्यवेक्षी अधिकारियों के लिए विशेष प्रशिक्षण और संवेदनशीलता के कार्यक्रम आयोजित किए जाएं.
  • 4. आम लोगों से पारदर्शी संवाद हो सके, ये भरोसा दिलाया जाए विधिवत नोटिस फिर सत्यापन और सुनवाई के बिना किसी का भी नाम मतदाता सूची से नहीं हटाया जाए.
  • 5. नियमित रूप से एक बुलेटिन जारी किया जाए. मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, मध्य प्रदेश की वेबसाइट और अन्य सार्वजनिक माध्यमों पर जारी इस बुलेटिन में नोटिसों की सेवा, सत्यापन की प्रगति और नाम विलोपन या बहाली की स्थिति स्पष्ट रूप से बताई और दिखाई जाए.