भोपाल। 
मध्यप्रदेश विधानसभा ने अपने स्थापना के 69 साल पूरे कर लिए हैं। ऐसे में आज 17 दिसंबर को विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र आयोजित किया गया है। सदन में चर्चा की शुरुआत करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सरकार के किए गए कामों और योजनाओं के जरिए आगामी समय में किए जाने वाले कामों के बारे में जानकारी दी। वहीं, चर्चा की शुरुआत में नेता प्रतिपक्ष ने विपक्ष के तेवर दिखाते हुए कहा कि चर्चा में नीयत होना चाहिए और सिर्फ घोषणाओं से काम नहीं चलेगा। उमंग सिंघार ने स्पष्ट किया कि 2047 से पहले हमें 2026 की गारंटी चाहिए। इसके अलावा उन्होंने सरकार से यह भी मांग की कि अपनी घोषणाओं को पूरा करने की गारंटी दी जाए।
मनरेगा योजना का नाम बदलने पर नारेबाजी
सत्र की शुरुआत से पहले ही मनरेगा योजना का नाम बदलने के विरोध में कांग्रेस के विधायकों ने विधानसभा परिसर में जमकर नारेबाजी की। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा, एक तरफ मोदी गांधी के चरखे चलाने की बात करते हैं। दूसरी तरफ महात्मा गांधी के नाम पर जो मनरेगा योजना थी, उस योजना में पैसा डालना बंद कर दिया। अब योजना का नाम बदलना चाहते हैं। क्या इन्हें बापू से डर लगता है?
सीएम बोले- एमपी में परिवर्तन का नया दौर
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह विशेष सत्र हम सबके लिए सौभाग्य की बात है। बाबा महाकाल की नगरी से मिली प्रेरणा पूरे राज्य में फैली है। उन्होंने कहा कि हम सब ने मिलकर दूरगामी निर्णय लिए हैं, जो आज भले ही छोटे लगें, लेकिन भविष्य में माइलस्टोन बनेंगे और जनता के जीवन में बदलाव लाएंगे, उनके कष्ट कम करेंगे।
नेता प्रतिपक्ष बोले- नेता भी है, नीति भी है, लेकिन नियत जरूरी
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि नेता भी है, नीति भी है, लेकिन नियत है कि नहीं, यह महत्वपूर्ण है। अगर लाइव टेलीकास्ट होता तो प्रदेश की 8 करोड़ जनता भी देख पाती कि प्रदेश सरकार 2047 के लिए क्या योजना ला रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री को बधाई दी कि लैंड पूलिंग एक्ट वापस लिया गया। साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि 2028 आने वाला है, लेकिन क्यों इसे भुलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों को MSP की गारंटी और OBC को 26 प्रतिशत आरक्षण मिलने की गारंटी देनी चाहिए।