भोपाल। 
विधानसभा का 17 दिसंबर को होने जा रहा विशेष सत्र में भाजपा और कांग्रेस की ओर से 10-10 वक्ता विकसित, आत्म निर्भर और समृद्ध मप्र बनाने को लेकर अपने-अपने सुझाव देंगे। सत्ता पक्ष और विपक्ष से नाम मांगे गए हैं। मप्र विधानसभा का विशेष सत्र 10 साल बाद होने जा रहा है, इससे पहले 2015 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में सत्र बुलाया गया था। इससे पहले 2000 में जब मप्र से अलग होकर छत्तीसगढ़ राज्य बना था, तब विशेष सत्र बुलाया गया था। 1997 में तत्कालीन सीएम दिग्विजय सिंह के कार्यकाल में विशेष सत्र बुलाया था। इसमें आजादी की 50वीं जयंती पर समारोह को लेकर चर्चा हुई थी।
एक दिवसीय इस विशेष सत्र में विजन 2047 के लिए राज्य सरकार द्वारा तय किए गए लक्ष्यों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों के सुझाव लिए जाएंगे। सरकार ने विकसित मप्र जन-जन के सहयोग से किए जाने का रोडमैप तैयार किया है, इसमें 2047 तक प्रदेश की इकॉनामी को 2.5 ट्रिलियन तक पहुंचाना है।
3 साल का रोलिंग बजट
विजन डॉक्यूमेंट 2047 के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए आगामी 2026-2027 का रोलिंग बजट होगा। इसमें पहली बार वर्ष 2027-2028 और 2028-29 के बजट का भी आकलन किया जाएगा। यानी तीन सालों में प्रदेश का बजट 5.74 लाख करोड़ रुपए का होगा। साथ ही कर्मचारियों का डीए इस साल के आगामी वित्तीय वर्ष के अंत तक 74 प्रतिशत और 2028-29 में 94 प्रतिशत के हिसाब से खर्च का आकलन किया जाएगा।
ये मुद्दे रहेंगे चर्चा में
आर्थिक लक्ष्य 2047 तक राज्य की जीडीपी 2.5 ट्रिलियन तक पहुंचाना और प्रति व्यक्ति आय 22 लाख रुपए तक बढ़ाना। सामाजिक लक्ष्य औसत आयु 84 वर्ष और साक्षरता दर 100 प्रतिशत करना। शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार। कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को संतुलित करते हुए औद्योगिक और सेवा क्षेत्रों को बढ़ावा देना।