भोपाल। 
ब्राह्मण बेटियों पर की गई टिप्पणी के बाद पहले से ही विवादों में घिरे IAS संतोष वर्मा पर अब एक और बयान भारी पड़ गया है। अजाक्स सम्मेलन में दिए गए उनके नए बयान एसटी वर्ग के बच्चों को सिविल जज बनने नहीं दे रहा हाईकोर्ट के बाद राज्य सरकार ने उन्हें कृषि विभाग से हटाकर मंत्रालय में उप सचिव के पद पर पदस्थ कर दिया है।
अजाक्स के सम्मेलन में बोलते हुए वर्मा ने हाईकोर्ट पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा—“एसटी वर्ग के बच्चों को सिविल जज कोई और नहीं, बल्कि हाईकोर्ट नहीं बनने दे रहा है। उन्होंने कहा कि यही हाईकोर्ट वह संस्था है, जिससे बाबा साहब के संविधान के हिसाब से चलने की गारंटी मांगी जाती है। इस बयान का वीडियो सामने आने के बाद मामला और भड़क गया।
सवर्ण संगठनों ने 14 दिसंबर को CM हाउस घेरने का ऐलान
वर्मा पहले से ही ब्राह्मण समाज और सवर्ण संगठनों के निशाने पर थे। अब हाईकोर्ट पर टिप्पणी के बाद विरोध और तेज हो गया। संगठनों का आरोप है कि एक वरिष्ठ अफसर संवैधानिक संस्थाओं की मर्यादा तोड़ रहे हैं और सरकार कार्रवाई से बच रही है। इसी के चलते सवर्ण समाज ने 14 दिसंबर को मुख्यमंत्री निवास घेराव की तैयारी शुरू कर दी है।

यह कहा था संतोष वर्मा ने अपने बयान में
अजाक्स सम्मेलन में आईएएस वर्मा ने कहा था- आपको पता है कि अभी जो एग्जाम हुए, उसमें एससी-एसटी के लोग सिलेक्ट नहीं हुए। उन्हें योग्य उम्मीदवार नहीं मिले। हमारे समाज का व्यक्ति आईएएस, आईपीएस, राज्य प्रशासनिक सेवा से डिप्टी कलेक्टर और डीएसपी बन सकता है, लेकिन सिविल जज नहीं बन सकता है। क्यों नहीं बन सकता... सिविल जज? आखिर ऐसी क्या पात्रता है जो हमारे समाज का व्यक्ति सिविल जज नहीं बन सकता है। हमारा बेटा, हमारा बच्चा, हमारे समाज के व्यक्ति क्लैट क्लियर करने के बाद एलएलबी, एलएलएम करते हैं। उसके बाद एग्जाम देकर बड़ी सर्विसेस में सिलेक्ट हो जाते हैं। उनके पासिंग मार्क्स 75 प्रतिशत से ऊपर हैं, लेकिन सिविल जज की ऐसी कौन सी परीक्षा होती है, जिसमें हमारा बच्चा 50 प्रतिशत नहीं ला सकता।

जानबूझकर एग्जाम में 49.95, इंटरव्यू में 19.5 नंबर
वर्मा यहीं नहीं रुके। उन्होंने कहा कि आपने कट ऑफ मार्क्स रख दिया है 50 प्रतिशत और आपने तय कर लिया कि इसे 49.95 नंबर देना है। 50 नंबर नहीं देना है। आपने देख लिया कि इंटरव्यू में 20 नंबर नहीं देना है। इसे 19.5 नंबर देना है। …तो कौन सिविल जज बना देगा, हमारे बच्चों को? ये कौन सा आरक्षण है...ये कौन सा नियम है। ये कौन कर रहा है…? यह हमारा हाईकोर्ट कर रहा है, जिससे हम न्याय की उम्मीद करते हैं, जिससे हम बाबा साहब के संविधान के हिसाब से चलने की गारंटी मांगते हैं। यह वहीं से हो रहा है। मेरा सिर्फ आपको यह कहना है कि जिस तरह से जूडिशरी से, न्यायपालिका से आपका बीज समाप्त किया जा रहा है। बीज समझते हो न आप, जब हमारा बेटा सिविल जज बनेगा, तभी तो हाईकोर्ट का जज बनेगा। जब हमारा बीज ही खत्म कर दिया तो न्याय की उम्मीद किससे करोगे। इसलिए मैं कह रहा था कि ये हमारी आखिरी पीढ़ी है। इससे लड़ने का दायित्व हमारा है। हम ही इससे लड़ सकते हैं।