भोपाल।
पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ जानते थे कि 4 महीने के अज्ञातवास के बाद किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में उनकी मौजूदगी भी खबर है. वे जानते थे कि जो कहेंगे उनके हर शब्द को तोल मोल के परखा जाएगा. शहर भोपाल था, मंच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का और मौका संघ विचारक मनमोहन वैद्य की पुस्तक हम और यह विश्व. उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफे के बाद धनखड़ इस मंच से सुनाई दिए. उन्होंने इन 4 महिने के पहले के घटनाक्रम और 4 महीने के दरमियान का मन खोल कर बेशक नहीं रखा लेकिन कह सब कुछ दिया. धनखड़ ने अपने भाषण की शुरुआत में ही कहा 4 महीने बाद. उन्होंने अपने भाषण के बीच में वन लाइनर में सार कह दिया. जिसे यूं समझिए कि कोई खास बात भी नहीं की और असल में सबकुछ कह दिया. फ्लाइट की देरी को लेकर जब मंच पर भाषण के दौरान उन्हें संदेश पहुंचाया गया तो धनखड़ ने कुछ ठहरकर मुस्कुराते हुए कहा मेरा रिसेंट पास्ट इसकी गवाही है, उन्होंने नेरेटिव का जिक्र किया और कहा कि भगवान करे कोई नैरेटिव के चक्कर में ना फंस जाए. इस चक्रव्यूह में कोई फंसा तो निकलना मुश्किल है. और फिर मुस्कुराते हुए बोले मैं अपना उदाहरण नहीं दे रहा हूं.
चार महीने बाद जब टूटी धनखड़ की चुप्पी, क्या बोले
चार महीने बाद पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ किसी सार्वजनिक समारोह में मौजूद थे. और मुख्य वक्ता की हैसियत से कार्यक्रम में उपस्थित थे. कार्यक्रम पुस्तक विमोचन का था. धनखड़ को बोलना पुस्तक विमोचन पर ही था पुस्तक पर केंद्रित भाषण भी था उनका. लेकिन 38 मिनिट के भाषण में शुरुआत से लेकर आखिर तक धनखड़ ने चार महीने पहले के घटनाक्रम की चुटकियों में बयानी करते रहे. भाषण की शुरुआत की ये चार पंक्तियां गौर करने लायक थी जिसमें वे कहते हैं, चार महीने बाद इस अवसर पर इस शहर में इस पुस्तक पर बोलने में मुझे संकोच नहीं करना चाहिए. जिस समय धनखड़ ने ये कहा पूरे सभागार में तालियों के साथ ठहाके लग गए.
धनखड़ कहा मैं अपना उदाहरण नहीं दे रहा
मनमोहन वैद्य की पुस्तक पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि किस तरह से पूरे देश में संघ के खिलाफ एक नैरेटिव तैयार किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि कैसे झूठ का भ्रम फैलाया जा रहा है. उन्होंने 2018 में पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि जब प्रणब मुखर्जी जी नागपुर संघ मुख्यालय पहुंचे थे तो उनके विरोध में कितने सुर उठे थे लेकिन किस तरह से एक पंक्ति में उन्होंने सब विरोधियों को चित कर दिया. धनखड़ ने फिर नैरेटिव का जिक्र किया और कहा कि भगवान करे नैरेटिव के चक्कर में कोई ना फंसे. उन्होंने आगे कहा मैं अपना उदाहरण नहीं दे रहा हूं.

'मैसेज आ गया लेकिन मैं कर्तव्य को नहीं छोड़ सकता'
धनखड़ ने अपना भाषण हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में दिया और ये भी कहा कि वे अब से भाषण अंग्रेजी में ही देंगे. उन्होंने इसकी वजह भी बताई. उन्होंने कहा मैंने बहुत सोच विचार के बाद ये निर्णय लिया है कि मैं आगे अंग्रेजी में ही संबोधन करूंगा. क्योंकि जो समझ नहीं रहे हैं, समझना नहीं चाहते हैं. जो देश की छवि धूमिल करना चाहते हैं. जब तक अंग्रेजी में नहीं बोलूंगा तब तक उनको मेरा सही मंतव्य पता नहीं चलेगा. भाषण के दौरान ही उनके पास पर्ची आई. जिसमें सूचना थी उनकी फ्लाईट को लेकर. इस पर धनखड़ ने फिर एक बार इशारों में बड़ी बात कही. उन्होंने कहा कि मैसेज आ गया है लेकिन माय रिसेंट पास्ट इज द ट्रूथ ऑफ देट कि मैं फ्लाईट पकड़ने के लिए कत्तर्व्य नहीं छोड़ सकता.