वोट चोरी मामले में पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त का खुलासा, हैदराबाद से भी आई थी ढाई लाख गलत वोटर जुड़ने की शिकायत
भोपाल।
राहुल गांधी ने वोट चोरी के बाद कर्नाटक में वोटर हटाए जाने का मामला उजागर किया है. इसे लेकर देश के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओ. पी रावत ने बड़ा खुलासा किया है. रावत ने हैदराबाद में वोटर लिस्ट से जुड़ी एक शिकायत का हवाला देते हुए बड़ा खुलासा किया. उन्होंने बताया कि देश के चुनाव आयुक्त रहते हुए इसी तरह की एक राजनीतिक दल की शिकायत पर उन्होंने किस तरह से एक्शन लिया था और क्या नतीजे आए थे. रावत ने बताया कि चुनाव आयोग से जुड़े वोट चोरी के इस पूरे मामले को डील करने में चूक कहां हुई. उन्होंने ये भी बताया कि राजनीतिक दलों की सीमाएं क्या हैं और चुनाव आयोग की जवाबदारी क्या हैं.
वोटर के नाम काटने जैसे मामले में क्या हो एक्शन?
राहुल गांधी जिस तरह से वोटरों के नाम काटे जाने का खुलासा कर रहे हैं. क्या चुनाव आयोग की जो मशीनरी है और जो सिस्टम है उसमें ऐसा संभव हो सकता है? ओपी रावत ने एक पॉडकास्ट में इस सवाल पर कहा, '' जिस तरह से आरोप लगा है उस तह से संभावना कम ही दिखती है.'' फिर वे चुनाव आयोग की फंक्शनिंग का हवाला देते हुए बताते हैं, '' एक राज्य में कम से कम पांच से छह लाख लोग इस काम में जुटते हैं. देश की बात की जाए तो कम से कम पच्चीस लाख लोग इस काम में लगे होंगे. अब सवाल ये है कि किस आदमी में दबाव को झेलने की कितनी क्षमता है कि वो सही ढंग से काम कर सके. ये भी सोचने की बात है. और ये पहली बार नहीं है इस तरह की शिकायतें आती हैं. ओपी रावत ने आगे कहा, '' चुनाव आयोग दूध का दूध पानी का पानी कर देता है. पहले भी ऐसी गडबड़ी मतदाता सूची में दिखती रही है. तुरंत उसकी जांच करवाके मामला पब्लिक डोमेन में डाल दिया जाता रहा है. इस तरह से मामला बढ़ता नहीं है. त्रुटियां मतदाता सूची में दिखती रही हैं. लेकिन निदान हुआ जांच हुई इसलिए ऐसी चीजें पहले कभी बढ़ नहीं पाईं.''
चुनाव आयोग की देरी से ऐसे बिगड़ी बात
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने कहा, '' असल में देरी से सारी बात बिगड़ी. कायदा ये है कि चुनाव आयोग में जब भी कोई शिकायत आए. स्टेक होल्डर की या वोटर्स की. उसकी घंटे दो घंटे, एक दिन में जांच करके सारी जानकारी पब्लिक डोमेन में डाल देना चाहिए. ताकि आम वोटर किसी भी तरह से विपरीत रुप से प्रभावित ना हो सके. जरा सा भी विलंब होगा तो स्नो बॉल होगा. उसका फायदा राजनीतिक दल उठा लेते हैं. इस मामले में दुर्भाग्य से यही हुआ कि विलंब हो गया. पहले ही केस में जांच अगर हो जाती. पब्लिक डोमन में परिणाम आ जाते. तो ये चलता रहता जांच होती और फैक्ट्स आते रहते. इस तरह से मुद्दा नहीं बनता.''
चुनाव आयुक्त रहते ऐसे लिया शिकायत पर एक्शन
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने बताया कि जब वे खुद चुनाव आयुक्त थे उस समय हैदराबाद में राजनीतिक दल की ओर से आई शिकायत पर तुरंत एक्शन लिया था. उन्होंने बताया, '' मेरे समय में भी शिकायत आई थी. हैदराबाद में दो ढाई लाख वोटर गलत जुड़ गए हैं . मैने जैसे ही शिकायत पढ़ी. मैंने वहां पॉलीटिकल पार्टी के अध्यक्ष को कॉन्टेक्ट किया और कहा कि कल सुबह दस बसे से सारे वार्ड जिनके लिए आपकी शिकायत है. वहां पर चुनाव आयोग की हर वार्ड के लिए अलग टीम रहेगी. आप वहां के लिए अपना प्रतिनिधि भी रख लें. जो घर-घर सर्वे करके इस मामले की जांच कर लेगी.''
हैदराबाद में किया था दूध का दूध पानी का पानी
हैदराबाद मामले पर उन्होंने आगे कहा, '' हमने बाकी राजनीतिक दलों को कहा कि वो भी अपना प्रतिनिधि रख लें. बाद में आपके प्रतिनिधि के दस्तखत के साथ जांच रिपोर्ट दी जाएगी. हमने जो दूध का दूध और पानी का पानी था पब्लिक डोमेन में डाल दिया.'' रावत कहते हैं, '' राजनीतिक दलों के पास जांच करने की कोई मशीनरी नहीं होती, उनके पास तो कार्यकर्ता ही है. उनका दायित्व होता है कि वर्कर जो शिकायत लाया है उसे ऊपर ले जाएं. उसका भरोसा होता है कि बात ऊपर उठाई जाएगी. लेकिन सरकारी सिस्टम के पास तो मशीनरी होती है. तुरंत जांच करो और उसे पब्लिक डोमेन में डाल दो. इसे हमें हमेशा ध्यान में रखना चाहिए.

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