पूर्व नेता प्रतिपक्ष गोविंद सिंह का शिवराज-मोहन सरकार की अफसरशाही पर तीखा हमला
भोपाल/भिंड, सबकी खबर। 
मध्य प्रदेश के भिंड जिले के लहार से एक बेहद शर्मनाक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने चंबल से लेकर भोपाल तक की सियासत और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। लहार के सुप्रसिद्ध और पवित्र मां मंगला देवी मंदिर परिसर में चल रहे वार्षिक मेले में संस्कृति और आस्था के नाम पर सरेआम अश्लीलता परोसी जा रही है। हैरानी की बात यह है कि जिस मंच के पीछे 'मंगला देवी मेला' और 'भगवान रामलीला' का बोर्ड टंगा है, ठीक उसी के नीचे फूहड़ गानों पर अश्लील और भोंडे डांस कराए जा रहे हैं। स्थानीय बुजुर्गों और प्रबुद्ध नागरिकों के लिए यह स्थिति बेहद शर्मनाक बनी हुई है।
इस पूरे मामले का सनसनीखेज खुलासा सबकी खबर के साथ हुए एक पॉडकॉस्ट के दौरान हुआ। इस अश्लील आयोजन के तीन अलग-अलग वीडियो साक्ष्य के तौर पर भी दिखाए गए, जिसमें फूहड़ गानों पर युवतियां और कथित तौर पर स्कूल-कॉलेज की मजबूर बच्चियां नाचती नजर आ रही हैं। इस गंभीर मुद्दे पर लहार का चार दशकों तक प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ कांग्रेस नेता, पूर्व नेता प्रतिपक्ष और लहार नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष डॉ. गोविंद सिंह ने शासन, प्रशासन और स्थानीय भाजपा विधायक पर जमकर भड़ास निकाली।
अयोग्य और 'फर्जी' सीएमओ
डॉ. गोविंद सिंह ने सीधे तौर पर लहार नगर पालिका के सीएमओ और स्थानीय भाजपा विधायक अमरीश शर्मा को इस दुर्दशा का जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश में जहां भी विपक्षी दलों की नगर पालिकाएं हैं, उन्हें गैर-प्रजातांत्रिक ढंग से कुचल दिया गया है। लहार नगर पालिका में 15 में से 13 पार्षद कांग्रेस के हैं और वहां अनुसूचित जाति (दलित) वर्ग की महिला मिथिलेश कुमारी निर्विरोध अध्यक्ष चुनी गई थीं। लेकिन सत्ता बदलते ही स्थानीय विधायक के दबाव में एक ऐसे अयोग्य और 'फर्जी' सीएमओ को बैठा दिया गया है, जिसका खुद का प्रमोशन संदिग्ध है और जिसके खिलाफ लोकायुक्त में केस दर्ज है।
80 साल पुराना है पवित्र मेले का इतिहास 
पूर्व नेता प्रतिपक्ष ने खुलासा किया कि इस पवित्र मेले का इतिहास 80 साल पुराना है। जब वे खुद नगर पालिका अध्यक्ष थे, तब मेले में दंगल, कबड्डी, खो-खो और बैडमिंटन जैसे खेल आयोजन होते थे। लेकिन आज बिना परिषद की मंजूरी के, सीएमओ अपनी वित्तीय शक्तियों का दुरुपयोग कर सरकारी पैसा पानी की तरह बहा रहे हैं और बाहर से पैसे देकर बुलाई गई लड़कियों से अश्लील डांस करवा रहे हैं। उन्होंने यह भी दर्दनाक दावा किया कि कुछ गरीब छात्राएं कॉलेज की फीस भरने की मजबूरी में इस नाच-गाने का हिस्सा बनने को मजबूर हैं।
भाजपा विधायक का भयंकर आतंक
स्थानीय स्तर पर विरोध न होने के सवाल पर डॉ. गोविंद सिंह ने कहा कि लहार में मौजूदा भाजपा विधायक का भयंकर आतंक है। विपक्ष के लोगों पर झूठे मुकदमों की बौछार कर दी जाती है। पूरा पुलिस और प्रशासनिक अमला विधायक के इशारे पर नाच रहा है। स्थिति यह है कि विधायक के भाई और पिता तक के पीछे सरकारी सुरक्षा गार्ड घूम रहे हैं, जबकि प्रोटोकॉल के तहत उन्हें इसका कोई अधिकार नहीं है। शासकीय कार्यक्रमों और महापुरुषों की प्रतिमाओं के अनावरण में नगर पालिका अध्यक्ष और पार्षदों को आमंत्रित तक नहीं किया जाता और भाजपा के मंडल अध्यक्ष फीता काट रहे हैं।
कचरे के ढेर में तब्दील हो चुका है लहार 
इतना ही नहीं, डॉ. गोविंद सिंह ने लहार नगर पालिका में चल रहे अमानवीय और जातिवादी रवैये का पर्दाफाश करते हुए बताया कि सीएमओ ने कर्मचारियों को सख्त हिदायत दे रखी है कि यदि किसी ने दलित वर्ग से आने वाली नगर पालिका अध्यक्ष या उपाध्यक्ष को पानी भी पिलाया, तो उसे नौकरी से निकाल दिया जाएगा। उपाध्यक्ष के घर के सामने पिछले दो साल से झाड़ू नहीं लगाई गई है, जिससे स्वच्छ लहार अब कचरे के ढेर में तब्दील हो चुका है। उन्होंने बताया कि इस तानाशाही की शिकायत उन्होंने स्थानीय शासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से भी की थी, लेकिन मुख्यमंत्री कार्यालय के हस्तक्षेप के आगे वे भी असहाय नजर आए।
बड़ा खुलासा... 
डॉ. सिंह ने स्थानीय भाजपा विधायक और काबीना मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बीच चल रही अंदरूनी खींचतान का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि चर्चा है कि विधायक अमरीश शर्मा के साले की 97 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी वाली मुंबई की कंपनी पर खुद विजयवर्गीय ने ही केस दर्ज करवाया है, जिसके चलते मुंबई क्राइम ब्रांच ने भोपाल से साले को गिरफ्तार किया था। इसी आपसी रंजिश और प्रशासनिक शह के कारण लहार की कानून-व्यवस्था और लोकतंत्र पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है। पवित्र धार्मिक स्थलों पर हो रहे इन भोंडे आयोजनों ने अब मुख्यमंत्री मोहन यादव की कानून-व्यवस्था और दावों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।