13 साल पुराना समझौता टूटा: डॉ. गोविंद सिंह और रावतपुरा महाराज के बीच छिड़ा 'महायुद्ध'
भिंड/लहार।
मध्य प्रदेश की राजनीति और आस्था के गलियारों में एक बार फिर तलवारें खिंच गई हैं। कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह ने रावतपुरा धाम के पीठाधीश्वर रावतपुरा महाराज (रविशंकर शर्मा) के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। डॉ. सिंह ने महाराज को एक बेहद कड़क पत्र लिखकर उन पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिससे पिछले 13 सालों से चला आ रहा 'युद्ध-विराम' आधिकारिक तौर पर खत्म हो गया है।
CBI की FIR और 'सियासी शरण' का आरोप
डॉ. गोविंद सिंह ने अपने पत्र में सनसनीखेज दावा किया है कि रावतपुरा महाराज के खिलाफ छत्तीसगढ़ के रायपुर मेडिकल कॉलेज में 250 सीटों की मान्यता दिलाने के लिए 55 लाख रुपये की रिश्वत देने के मामले में सीबीआई (CBI) ने एफआईआर दर्ज की है। डॉ. सिंह का आरोप है कि सीबीआई की इस कार्रवाई और संभावित गिरफ्तारी से बचने के लिए महाराज ने रावतपुरा धाम जैसे पवित्र स्थान को 'भारतीय जनता पार्टी का केंद्र' बना दिया है। उन्होंने कहा कि महाराज अपनी वफादारी सिद्ध करने और भाजपा नेताओं को खुश करने के लिए धाम का दुरुपयोग कर रहे हैं।
2013 का वो 'सीक्रेट' समझौता
इस विवाद की जड़ें बहुत पुरानी हैं। 90 के दशक से ही डॉ. गोविंद सिंह और रावतपुरा महाराज के बीच भीषण सियासी अदावत रही है। गोविंद सिंह को चुनाव हरवाने के लिए महाराज ने कई बार बिसात बिछाई, लेकिन वे हर बार नाकाम रहे। साल 2013 में कांग्रेस के बड़े नेताओं की मध्यस्थता के बाद दोनों के बीच एक समझौता हुआ था कि रावतपुरा धाम को राजनीतिक अखाड़ा नहीं बनाया जाएगा और दोनों एक-दूसरे के खिलाफ बयानबाजी नहीं करेंगे। डॉ. गोविंद सिंह ने अपने पत्र में इसी वादे की याद दिलाते हुए कहा कि महाराज ने अब उस मर्यादा को लांघ दिया है।
बीजेपी का प्रशिक्षण शिविर बना विवाद की जड़
ताजा विवाद की मुख्य वजह रावतपुरा धाम में भाजपा का प्रशिक्षण शिविर आयोजित होना है। डॉ. गोविंद सिंह का कहना है कि जहां कभी भक्तों की लाइन लगती थी, आज वहां भाजपा की राजनीतिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या त्याग और आध्यात्म का केंद्र केवल एक राजनीतिक दल की सुख-सुविधाओं के लिए है?
प्रतिष्ठा पर संकट
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि महाराज की अति महत्वाकांक्षाओं और उनके द्वारा खोले गए लगभग 50 आर्थिक व शैक्षणिक संस्थानों के कारण रावतपुरा की छवि धूमिल हुई है। डॉ. सिंह ने साफ किया कि 'लहार' का नागरिक होने के नाते वे इस विसंगति पर चुप नहीं रहेंगे। इस पत्र के बाद ग्वालियर-चंबल संभाग की राजनीति गरमा गई है। डॉ. गोविंद सिंह ने इस कदम से न केवल महाराज को घेरा है, बल्कि अपने कार्यकर्ताओं को भी यह संदेश दे दिया है कि अब कोई समझौता नहीं होगा। अब देखना यह है कि रावतपुरा महाराज इस सीधे हमले का क्या जवाब देते हैं और क्या यह लड़ाई एक बार फिर 2013 के पहले वाले हिंसक और उग्र मोड़ पर पहुंच जाएगी।

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