भोपाल। 
मध्य प्रदेश की सियासत में इन दिनों भिंड का लहार क्षेत्र चर्चा का केंद्र बना हुआ है, जहां हार-जीत के बाद भी जंग थमने का नाम नहीं ले रही। हाल ही में भाजपा विधायक अमरीश शर्मा द्वारा अपनी ही सरकार के खिलाफ दिए गए धरने ने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। विधायक का आरोप है कि पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह का दबदबा आज भी कायम है और अधिकारी उन्हीं को 'सलाम' ठोकते हैं। उन्होंने डॉ. सिंह पर दलितों की जमीन कब्जाने और कोठी के अवैध निर्माण के गंभीर आरोप लगाए, जिसके जवाब में आज डॉ. गोविंद सिंह 
ने सबकी खबर के साथ एक पॉडकॉस्ट में विधायक अमरिश शर्मा को खुली चुनौती दे डाली। 
डॉ. गोविंद सिंह ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए विधायक अमरीश शर्मा को खुली चुनौती दी है। उन्होंने कहा कि अगर विधायक में हिम्मत है तो वे हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में अपने और मेरे, दोनों के बंगलों का सीमांकन करा लें। डॉ. सिंह का दावा है कि जिस जमीन पर आज विधायक का 5000 वर्ग फुट का बंगला खड़ा है, वह कभी उन्होंने खुद नगरपालिका अध्यक्ष रहते हुए शर्मा परिवार को महज 300 वर्ग फुट आवंटित की थी। उन्होंने कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव पर भाजपा विधायक का 'गुलाम' होने का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रशासन के दबाव में उनकी कोठी के सर्वे की रिपोर्ट रातों-रात बदल दी गई।
डॉ. सिंह यहीं नहीं रुके, उन्होंने विधायक और उनके परिवार पर 250 अरब से अधिक के आर्थिक घोटाले और फर्जी कंपनियां बनाकर धोखाधड़ी करने के आरोप लगाए। उन्होंने विधायक के साले की गिरफ्तारी और 17 आपराधिक मामलों का जिक्र करते हुए उन्हें 'माफियाओं का सरदार' करार दिया। साथ ही, रेत के अवैध उत्खनन में विधायक की संलिप्तता का दावा करते हुए कहा कि 'राधा रानी' और 'पापा जी' लिखे ट्रैक्टरों को पकड़ने की हिम्मत किसी पुलिसवाले में नहीं है। अब गेंद मुख्यमंत्री और भाजपा संगठन के पाले में है कि वे इस 'धरना पॉलिटिक्स' के बीच लहार की सच्चाई जनता के सामने कैसे लाते हैं।