भाजपा विधायक ने कहा मुझ पर लगाए आरोप सब निराधार.... रेत वालों से महीना वसूल रहे हैं कलेक्टर
भिण्ड, सबकी खबर।
भिण्ड में बुधवार को हुई कलेक्टर और विधायक की भिडंत में अब आरोप प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया हैं। हमने इस संबंध में विधायक नरेंद्र कुशवाह से बात की तो उनका कहना था कि किसान मेरे पास आए थे खाद की बात को लेकर किसानों का कहना था कि कलेक्टर उनकी सुन नहीं रहे हैं। वहीं बात करने में कलेक्टर के निवास गया था। उनकी हठधर्मिता के चलते आज जिले में किसानों को खाद नहीं मिल रही हैं। जब कलेक्टर के आरोपों पर विधायक से सवाल किया गया तो उनका कहना था कि मैं रेत का काम नहीं करता। कलेक्टर खुद रेत वालों से महीने का पैसा वसूल रहे हैं। रिश्वत के पैसों से ही कलेक्टर ने अभी 18.20 लाख रूपए कीमत की कार भी खरीदी हैं इसकी भी जांच होनी चाहिए। विधायक ने कहा कि प्रभारी म़ंत्री को हमने अवगत करा दिया है। इसकी शिकायत मुख्यमंत्री से की जाएगी। मैं खाद की शिकायत लेकर गया था किसान भाईयों के समस्याओं को सुलझाने गया था वह नासमझ कलेक्टर रेत चोरी की बात कर रहा हैं जबकि वह खुद रेत माफियाओे से पैसे वसूल रहा है।
यह बहुत ही शर्मनाक हैं: जीपी माली
राज्य प्रशासनिक सेवा संघ के प्रशासक जीपी माली से हमने इस संबंध में बात की श्री माली का कहना था कि किसी जनप्रतिनिधि का इस तरह का व्यवहार बहुत ही शर्मनाक हैं विधायक की जो भी बात थी समस्या थी वह कलेक्टर के आफिस में भी जाकर हो सकती है। लेकिन इस तरह घर जाना तंबू ठोंकना और हाथ उठाने का प्रयास करना यह निश्चित ही लोकतंत्र के लिए एक अच्छा संकेत नहीं है। यह अत्यंत गंभीर बात है और इस पर हमारे संवेदनशील मुख्यमंत्री जी हैं उनको इस पर संज्ञान लेना चाहिए। विगत 10 सालों में इस तरह की कई घटनाएं हुई हैं लेकिन कलेक्टर के साथ जो व्यवहार किया गया ऐसा पहली बार ही देखने को मिल रहा है। निश्चित तौर पर इस घटना के दोनो पहलूओं को समझना होगा। जिले में जो भी शासन प्रशासन चलता है उसमें विधायकों की और जनप्रतिनिधियों की बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका होती है। कलेक्टर के साथ उनका समन्वय अगर अच्छा होगा तो प्रशासन अच्छा चलेगा और समन्वय अगर ठीक नहीं होगा तो इस तरह की घटनाएं कभी भी हो सकती हैं। इसमें प्रभारी मंत्री की बड़ी भूमिका होती हैं प्रभारी मंत्री का रोल जो है मुख्यमंत्री की तरह जिले में होता है। खाद के संकट की जहां तक बात है खाद सरकार पहले गवर्नमेंट ऑफ इंडिया से भारत सरकार से अलॉट होता है कोटा वो राज्य सरकार में आता है और राज्य सरकार से फिर जिलों में जाता है। इस घटना में आपसी सामंजस्य का न होना साफ दर्शाता हैं क्योंकि जो अफसरों को नहीं पता वह जनप्रतिनिधियों को पता है। अफसर 10 आदमी से मिलते हैं तो जनप्रतिनिधि 1000 आदमियों से मिलते हैं जो
है तो फिर भी मेरा कहना यह है कि चाहे समन्वय की कमी हो या कुछ भी हो मगर इस तरह का जो कृत है इस तरह का जो व्यवहार है वो अत्यंत निंदनीय है। इसमें मैं यहां पुलिस की भी गलती मानता हूं कि यदि इस तरह का कोई घटना हुई उन्होंने कोई गाली दी कोई इस तरह से मारने का तो उन विधायक के खिलाफ जो है वहां के जो भी थाना है जो भी एसपी है उनको इस पे सख्त कारवाई करनी चाहिए और एफआईआर
भी कायम करनी चाहिए

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