बड़वानी।
जिले में पड़ रही भीषण गर्मी अब वन्य जीवों के लिए भी जानलेवा साबित होने लगी है। रविवार दोपहर ग्राम दवाना में एक कोबरा सांप तेज गर्मी और पानी की कमी के कारण सड़क किनारे अचेत अवस्था में मिला। ग्रामीणों की सूचना पर तलवाड़ा डेब के सर्पमित्र निलेश उपाध्याय मौके पर पहुंचे और सांप को बचाने की कोशिश की, लेकिन तब तक उसकी हालत बेहद गंभीर हो चुकी थी। कुछ ही देर बाद कोबरा ने दम तोड़ दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सांप अत्यधिक गर्म सतह पर लंबे समय तक पड़ा रहा, जिससे उसके शरीर का तापमान असंतुलित हो गया। सर्पमित्र ने उसे पानी देने और सक्रिय करने का प्रयास किया। यहां तक कि उसने अपने मुंह से सांप के मुंह में सांस देखकर सीपीआर की प्रक्रिया भी अपना ली. स्थानीय लोगों के बीच इसे 'सीपीआर' देने की कोशिश बताया गया, हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि सांपों पर इंसानों की तरह CPR प्रभावी नहीं होता। ऐसे में इस तरह की सीपीआर की प्रक्रिया वैज्ञानिक रूप से सही नहीं ठहराई जा सकती।
सांप की नाजुक पसलियों पर दबाव डालना खतरनाक
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार सांपों की शारीरिक संरचना इंसानों से पूरी तरह अलग होती है। अधिकांश प्रजातियों में केवल एक सक्रिय फेफड़ा होता है और वे डायाफ्राम के बजाय पसलियों की गतिविधि से सांस लेते हैं। उनकी नाजुक पसलियों पर दबाव डालना खतरनाक साबित हो सकता है। इसके अलावा जहरीले सांप के मुंह के पास जाना भी जोखिमभरा होता है, क्योंकि वह अचेत अवस्था में भी प्रतिक्रिया स्वरूप काट सकता है।
सांप को मुंह से सांस देना नुकसान दायक हो सकता है
विशेषज्ञ बताते हैं कि, आपात स्थिति में प्रशिक्षित पशु चिकित्सक विशेष उपकरणों और नियंत्रित ऑक्सीजन तकनीक की मदद से ही सरीसृपों का उपचार करते हैं। सामान्य व्यक्ति द्वारा मुंह से सांस देना या दबाव डालना नुकसानदायक हो सकता है।
वन्य जीव दिखे तो खुद इलाज न करें, विभाग को सूचना दें
सर्पमित्र निलेश उपाध्याय ने लोगों से अपील की कि गर्मी के मौसम में खेतों, गांवों और जंगल किनारे मिट्टी के बर्तनों में पानी रखें, ताकि पक्षियों और वन्य जीवों को राहत मिल सके। उन्होंने कहा कि कोई भी घायल या बीमार वन्य जीव दिखने पर स्वयं इलाज करने के बजाय तुरंत वन विभाग या प्रशिक्षित सर्पमित्र को सूचना दें।