अशोकनगर। 
राजनीति के मैदान में उतरने से पहले कभी-कभी शब्दों की 'गुगली' दिग्गज खिलाड़ियों को भी क्लीन बोल्ड कर देती है। कुछ ऐसा ही हुआ केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के बेटे और MPCA के अध्यक्ष महानआर्यमन सिंधिया के साथ। मुंगावली में जब वे क्रिकेट के बल्ले से चौके-छक्के जड़ रहे थे, तब तो सब 'परफेक्ट' था, लेकिन जैसे ही माइक हाथ में थामकर मंच पर आए, उनकी जुबान फिसल गई।
क्या था पूरा मामला?
महानआर्यमन सिंधिया अशोकनगर के मुंगावली में 'अर्जुन कप क्रिकेट टूर्नामेंट' का शुभारंभ करने पहुंचे थे। इत्तेफाक से यह दिन 'शहीद दिवस' का था। मंच से संबोधन के दौरान उन्होंने क्रांतिकारी भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को श्रद्धांजलि देने के बजाय कह दिया: "भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु दिवस पर सबको शुभकामनाएं, हमारे पूरे परिवार को शुभकामनाएं।"
मैदान पर 'हिट', मंच पर 'मिस'
एक तरफ जहां महानआर्यमन ने क्रिकेट की पिच पर बेहतरीन शॉट खेले और खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाया, वहीं 'शुभकामनाएं' वाले बयान ने सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। लोग इसे 'स्लिप ऑफ टंग' (जुबान फिसलना) मान रहे हैं, लेकिन विपक्ष के लिए यह एक परोसा हुआ मुद्दा बन गया है। राजनीति के सवाल पर उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका मकसद राजनीतिक नहीं, बल्कि प्रेम और विकास का रिश्ता जोड़ना है। वे युवाओं के लिए एक बेहतर मंच तैयार करना चाहते हैं। कहते हैं कि सियासत की पिच पर हर गेंद को संभलकर खेलना पड़ता है। महानआर्यमन भले ही इसे एक मानवीय भूल कहें, लेकिन सार्वजनिक जीवन में शब्दों का चयन ही आपकी छवि तय करता है। अब देखना यह है कि विपक्ष इस 'कैच' को कितनी मजबूती से लपकता है।