अनूपपुर। 
मध्य प्रदेश की सियासत में आदिवासियों की पहचान को लेकर एक नया मोर्चा खुल गया है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने अनूपपुर में आयोजित एक जनजातीय सम्मेलन में आदिवासियों के लिए अलग धर्म कोड की मांग उठाकर सत्ता के गलियारों में हलचल तेज कर दी है। सिंघार ने दो टूक कहा कि यदि आदिवासियों को अन्य धर्मों के तहत गिना जाता रहा, तो भविष्य में उनकी विशिष्ट पहचान और संवैधानिक अधिकार दोनों मिट जाएंगे।
'चुप रहे तो कोई सुनने वाला नहीं मिलेगा'
सिंघार ने आदिवासियों को आगाह किया कि जनगणना के दौरान अपनी अलग पहचान दर्ज कराना अस्तित्व की लड़ाई है। उन्होंने जनता से सीधा संवाद करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश से कम से कम 50 लाख आवेदन राष्ट्रपति के पास पहुंचने चाहिए ताकि दिल्ली को आदिवासियों की ताकत का अहसास हो। उनका तर्क है कि अगर आदिवासी समुदाय अन्य धर्मों में विलीन हो गया, तो आरक्षण और वन अधिकार जैसे सुरक्षा कवच कमजोर पड़ जाएंगे। 
भाजपा ने किया पलटवार
सिंघार के इस बयान पर मोहन सरकार के कैबिनेट मंत्री विश्वास सारंग ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कांग्रेस पर आदिवासियों को गुमराह करने और समाज को बांटने का आरोप लगाया। सारंग ने मांग की है कि जनगणना जैसी संवैधानिक प्रक्रिया में बाधा डालने और भ्रम फैलाने के जुर्म में सिंघार पर आपराधिक मामला दर्ज होना चाहिए।
क्यों अहम है यह विवाद?
दरअसल, भारत की जनगणना में आदिवासियों के लिए अलग रिलिजन कोड नहीं होता। उन्हें हिंदू, ईसाई या अन्य के कॉलम में अपनी जानकारी देनी पड़ती है। आदिवासी संगठनों का तर्क है कि वे प्रकृति पूजक हैं, इसलिए उनका धर्म सरना या गोंडी के रूप में अलग दर्ज होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट्स में भी इस मुद्दे पर कई याचिकाएं लंबित हैं। मध्य प्रदेश में सिंघार का यह कदम सीधे तौर पर आगामी चुनावों और जनगणना से पहले बड़े वोट बैंक को लामबंद करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।