भोपाल। 
प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने मुकेश नायक, अभय दुबे और सुखदेव पांसे के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मोहन सरकार के “कृषक कल्याण वर्ष” पर सवाल उठाए। पटवारी ने कहा कि सरकार किसानों के कल्याण की बात कर रही है, जबकि कृषि तंत्र में भारी कमी और बाजार में किसानों को उचित कीमत नहीं मिल रही है।
सीएम पहलवान लेकिन अफसरों के दांव में चित हो जाते हैं
पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पर तंज कसते हुए कहा कि वे शुरुआती दिनों में पहलवानी करते थे और उज्जैन में उन्हें पहलवान के नाम से जाना जाता है। लेकिन अब हालात ऐसे हैं कि जब कोई अधिकारी उनके पास आता है और “पहलवानी का दांव” देता है तो मुख्यमंत्री खुद ही चित हो जाते हैं। पटवारी ने कहा कि ऐसी स्थिति एक-दो बार नहीं बल्कि लगभग हर महीने देखने को मिलती है। मुख्यमंत्री को अपने पद की गरिमा का ध्यान रखना चाहिए।
सीएम के जिले में 18सौ रुपए क्विंटल बिक रहा गेहूं
उन्होंने कहा कि भाजपा ने किसानों को तीन बड़ी गारंटियां दी थीं, गेहूं 2700 रुपए प्रति क्विंटल, धान 3100 रुपए प्रति क्विंटल और सोयाबीन 6000 रुपए प्रति क्विंटल खरीदने की बात कही थी। लेकिन हकीकत यह है कि उज्जैन मंडी में गेहूं 1800 से 1900 रुपए प्रति क्विंटल तक बिक रहा है। यह स्थिति मुख्यमंत्री के अपने विधानसभा क्षेत्र की मंडी की है। पटवारी ने कहा कि कांग्रेस ने इसका वीडियो भी जारी किया था, जिससे साफ है कि एक तरफ सरकार कृषि कल्याण की बात करती है और दूसरी तरफ किसानों को उचित दाम तक नहीं मिल पा रहा है।
मुख्यमंत्री एक साल का हिसाब दे दें
जीतू पटवारी ने कहा, मुख्यमंत्री को पिछले 20 साल का नहीं, सिर्फ पिछले एक साल का हिसाब देना चाहिए। अगर सरकार सच में किसानों के हित में काम कर रही है तो वह अपने एक साल के काम का ब्योरा सार्वजनिक करे।
पटवारी ने आरोप लगाया कि प्रदेश में कृषि व्यवस्था सरकारी उदासीनता के बोझ तले दम तोड़ रही है। कृषि विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार विभाग में स्वीकृत 14,537 पदों में से 8,468 पद खाली हैं, यानी लगभग 60 प्रतिशत कर्मचारी नहीं हैं। इसके अलावा मत्स्य पालन विभाग में 1,290 में से 722 पद रिक्त हैं, उद्यानिकी विभाग में 3,079 में से 1,459 पद खाली हैं और पशुपालन व डेयरी विभाग में भी बड़ी संख्या में पद रिक्त पड़े हैं।