कैदी बने RJ, हर बैरक में पहुंच रही आवाज, सतना सेंट्रल जेल में नई पहल, सलाखों के पीछे गूंज रही 'जेलवाणी'
सतना।
अक्सर जेल का नाम सुनते ही ऊंची दीवारें, उदासी और सन्नाटे की तस्वीर उभरती है, लेकिन मध्य प्रदेश की सतना सेंट्रल जेल की फिजा इन दिनों बदली-बदली है। यहां अब सुबह की शुरुआत किसी सायरन से नहीं, बल्कि मधुर भजनों और ज्ञानवर्धक बातों से होती है। जेल प्रबंधन ने बंदियों को मानसिक तनाव से दूर रखने और उनके जीवन में सुधार लाने के लिए जेलवाणी नाम से एक अनूठी पहल शुरू की है, जो अब कैदियों के सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो रही है।
कैदी ही हैं 'रेडियो जॉकी' संभालते हैं माइक
इस पहल की सबसे खास बात यह है कि इसका संचालन खुद कैदी ही करते हैं। जेल प्रबंधन ने ऐसे तीन कैदियों का चयन किया है, जिन्हें अध्यात्म और संगीत का अच्छा ज्ञान है। ये कैदी अब एक रेडियो जॉकी' की भूमिका निभा रहे हैं। सुबह 7 बजे से 8:30 बजे तक एक कैदी स्टूडियो में बैठकर माइक संभालता है और 'जेलवाणी' का प्रसारण शुरू करता है। इसके बाद दोपहर 12.30 बजे से दूसरा सत्र शुरू होता है।
हर बैरक में है स्पीकर
जेल के हर बैरक में स्पीकर लगाए गए हैं। 'जेलवाणी' के माध्यम से कैदियों को भजन-कीर्तन, मोटिवेशनल गाने और ज्ञानवर्धक कहानियां सुनाई जाती हैं। इससे बंदियों का न केवल मनोरंजन होता है, बल्कि उन्हें मानसिक शांति भी मिलती है। जेल के अंदर होने वाले किसी भी कार्यक्रम का लाइव प्रसारण भी इसी सिस्टम के जरिए हर बैरक तक पहुंचता है।
प्रबंधन के लिए बना 'कम्युनिकेशन' का जरिया
मनोरंजन और सुधार के अलावा, जेलवाणी प्रशासन के लिए भी मददगार साबित हो रही है। जेल प्रबंधन को जब भी कैदियों को कोई निर्देश देना होता है या किसी कार्यक्रम के लिए इकट्ठा करना होता है, तो 'जेलवाणी' के जरिए एक बार में ही सभी तक संदेश पहुंचा दिया जाता है। इसके माध्यम से कैदियों को रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है, जिससे वे अपराध बोध से बाहर निकलकर समाज की मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।
कैदियों के व्यवहार में आया सुधार
उपजेल अधीक्षक सोनवीर सिंह कुशवाह ने बताया जेलवाणी का मुख्य उद्देश्य बंदियों को मानसिक रूप से स्वस्थ रखना और उनके जीवन में सुधार लाना है। शिक्षा, भजन-कीर्तन और रचनात्मक गतिविधियों के जरिए हम उन्हें तनावमुक्त रखने का प्रयास कर रहे हैं। इसकी शुरुआत 2016 में हुई थी। जब से सतना सेंट्रल जेल में जेलवाणी की शुरुआत हुई है, बंदियों के दैनिक क्रियाकलाप और व्यवहार में काफी सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है।

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