यूजीसी के नए नियम के खिलाफ बच्चों को साक्षी मानकर सवर्णों ने खाई कसम, 'बीजेपी को अब नहीं करेंगे वोट'
अशोकनगर।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की ओर से जारी 'उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नियम 2026' ने देश के सवर्ण समाज में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। जिसके विरोध अशोकनगर में सवर्ण संगठनों विरोध शुरू करते हुए अपने बच्चों को साक्षी मानकर ऐसी शपथ ले ली कि जानकार बीजेपी में खलबली मच जाएगी। सवर्ण समाज के लोगों ने बीजेपी को वोट नहीं देने की कसम खाई है।
यूजीसी के नए नियम का विरोध
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की तरफ से उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने के उद्देश्य से 'उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नियम 2026' को लागू किया गया है। वहीं, यह रेगुलेशन 15 जनवरी 2026 से देश के समस्त उच्च शिक्षण संस्थानों में लागू भी किया गया लेकिन अब इस कानून को लेकर सवर्ण समाज में भारी आक्रोश है। इस कानून को सवर्णों ने बांटने वाला कानून बताया है। अब इस कानून के विरोध में सड़कों पर उतरने की तैयारी की जा रही है।
सवर्ण समाज के लिए काला कानून
मध्यप्रदेश के अशोकनगर जिले में एक बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में करणी सेना, सवर्ण आर्मी, अग्रवाल समाज, ब्राह्मण समाज, रघुवंशी समाज सहित जैन समाज के प्रतिनिधि शामिल हुए। इस कानून को सवर्ण समाज के बच्चों के लिए काला कानून बताया। इस काले कानून के खिलाफ आंदोलन की रूपरेखा तैयार की गई और 30 जनवरी को सामूहिक विज्ञापन देने पर सहमति बनाई।
भाजपा को वोट नहीं देने की ली शपथ
इस दौरान बैठक सवर्ण आर्मी के जिला अध्यक्ष अभिषेक शर्मा ने कहा कि केंद्र से लेकर राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है। केंद्र सरकार का इस काले कानून पर सहमति देना सवर्ण समाज पर अत्याचार है। इस दौरान बैठक में उपस्थित लोगों ने हाथ उठाकर यूजीसी कानून के विरोध में भारतीय जनता पार्टी को अपने बच्चों को साक्षी मानकर शपथ ली कि वह भाजपा को वोट नहीं देंगे। सरकार को यह कानून वापस लेना होगा।

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