फायर एक्ट के बिना खतरे में मध्यप्रदेश और खतरों के खिलाड़ी भी, 4 साल से एक्ट बनाने में ही लगी सरकार
भोपाल।
मध्यप्रदेश आज भी उन गिने-चुने राज्यों में शामिल है जहां आज भी फायर एक्ट लागू नहीं हो पाया है. जबकि देश के 20 से अधिक राज्यों में फायर एक्ट पहले से लागू है. फायर एक्ट न होने का सीधा असर प्रदेश की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पर साफ नजर आता है. आगजनी की घटनाओं से निपटने के लिए न तो ठोस प्रणाली है, ना कानून है और ना है आधुनिक फायर ब्रिगेड तंत्र. वर्तमान स्थिति ऐसी है कि खतरों के खिलाड़ी यानी फायर ब्रिगेड खुद खतरे में है.
पुरानी गाड़ियां, बिना ट्रेनिंग स्टाफ, फायर ब्रिगेड खुद संकट में
कई शहरों में फायर ब्रिगेड की गाड़ियां 20-25 साल पुरानी हो चुकी हैं, जो तकनीकी रूप से कमजोर हैं और कई बार मौके पर ही जवाब दे देती हैं. आधुनिक फायर फाइटिंग उपकरण, हाइड्रॉलिक प्लेटफॉर्म, हाई-प्रेशर वॉटर सिस्टम और रेस्क्यू टूल्स की भारी कमी है. बीते तीन माह में भोपाल के टिंबर मार्केट में दो बड़ी आगजनी की घटनाएं सामने आईं, जिनमें करोड़ों का नुकसान हुआ. इन घटनाओं के बाद भी फायर सेफ्टी में कोई ठोस सुधार नजर नहीं आया. न तो फायर सेफ्टी ऑडिट को गंभीरता से लागू किया गया और न ही संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त इंतजाम किए गए. स्पष्ट है कि मध्यप्रदेश को अब तत्काल फायर एक्ट लागू करने, फायर ब्रिगेड को आधुनिक बनाने, प्रशिक्षित कर्मियों की भर्ती और नियमित ट्रेनिंग की सख्त जरूरत है. जब तक कानून और संसाधन मजबूत नहीं होंगे, तब तक आग पर काबू नहीं, बल्कि नुकसान पर सिर्फ अफसोस ही होता रहेगा.
लाचार नजर आता है फायर ब्रिगेड विभाग
फायर ब्रिगेड तंत्र वर्तमान में लाचार नजर आता है, जब कहीं आग लगती है तो नगर निगम के सामान्य कर्मचारी ही फायर ब्रिगेड के साथ मौके पर भेज दिए जाते हैं. इनमें से अधिकांश कर्मचारियों को न तो अग्निशमन का प्रशिक्षण मिला होता है और न ही उन्हें आग बुझाने का कोई व्यावहारिक अनुभव होता है. ऐसे में वे खुद भी जोखिम में रहते हैं और आम जनता की जान-माल की सुरक्षा भी खतरे में पड़ जाती है. नगर निगम के सहायक फायर अधिकारी सौरभ कुमार पटेल ने बताया, '' नगरीय प्रशासन विभाग हमें फायर ब्रिगेड के लिए 8 से 10 नई गाड़ियां उपलब्ध कराने जा रहा है. पुरानी गाड़ियों से आग बुझाने में दिक्कतें तो आती हैं पर हमारी नगर निगम वर्कशॉप में सभी का मेंटनेंस किया जाता है. बात करें फायर सेफ्टी एक्ट की तो इस एक्ट को लेकर तैयारी चल रही है लेकिन अभी तक नहीं आया है. 20 से ज्यादा राज्यों में फायर एक्ट आ चुका है.''

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