रीवा। 
रीवा जिले के सेमरिया से कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा ने रीवा कलेक्टर प्रतिभा पाल को भ्रष्ट कहा है। मंगलवार को विधानसभा परिसर में मीडिया से चर्चा करते हुए विधायक अभय मिश्रा ने कहा, हमारे यहां की कलेक्टर भ्रष्ट हैं। पैसा उनकी कमजोरी है। वो रुपया-पैसा कमाती हैं। उन्होंने आदमी पाल रखे हैं। अभय मिश्रा ने कहा- हमारे यहां के 58 किसान ऐसे हैं, जिन्होंने सरकार द्वारा विजया वेयर हाउस पर बनाए गए सरकारी उपार्जन केंद्र पर अपनी उपज बेची। जो किसान पहले खाद के लिए लाठी खाते हैं, उधार लेते हैं, मेहनत करके खेती करते हैं, उनका मेहनत का पैसा नहीं मिल रहा है। उन किसानों से यह गलती हो गई कि उन्होंने विजया वेयर हाउस पर सरकारी खरीदी केंद्र पर उपार्जन नीति के तहत अपनी उपज बेची। उन्हें फसल बेचने का दाम नहीं मिला।
कलेक्टर कई मामलों में बराबर पैसे लेती हैं- मिश्रा
अभय मिश्रा ने कहा- सहकारिता के समिति प्रबंधक, वेयर हाउसिंग और नान (नागरिक आपूर्ति निगम) इनकी मिलकर उपार्जन समिति होती है। कलेक्टर इस समिति की अध्यक्ष होती हैं। हमारे यहां की कलेक्टर भ्रष्ट हैं। इसमें भी उन्होंने आदमी पाल रखे हैं।
एक व्यक्ति कई सालों से अपने गांव में पदस्थ
विधायक ने कहा- हमारे यहां एक ज्ञानेंद्र नाम का शख्स है, जो नियम विरुद्ध चार-पांच साल से गृह ग्राम में बना हुआ है। अधिकारी उत्तर बनाकर भेज देते हैं कि ये गुढ़ का निवासी है, रीवा जिले का नहीं हैं। जैसे हम कहें कि मैं बैरागढ़ का हूं, भोपाल का रहने वाला नहीं हूं। इस तरह से उसके माध्यम से कलेक्टर पैसा लेती हैं। पेपर बताते हैं हाथों-हाथ लें तो ट्रेप हो जाएं। लेकिन, वर्किंग बता देती है उनके द्वारा उन्हीं 5 समितियों को काम देना। मेरे पास इसके पेपर हैं।
सांसद की पत्नी के वेयरहाउस में बना था खरीदी केंद्र
विधायक ने कहा, हमारे सांसद जी की पत्नी के नाम का एक वेयर हाउस है, उसमें सांसद जी का दोष नहीं हैं। वेयर हाउस में तो सरकार केंद्र बनाकर कराती है। ये बात अलग है कि उनके प्रभाव में ज्यादा भर दें, या वहां खरीदी केंद्र बना दें। लेकिन इसमें सांसद का कोई इन्वॉल्वमेंट नहीं होता।
फर्जी किसानों के नाम से कराए पंजीयन
विधायक ने कहा, इस मामले में समिति प्रबंधक ने खरीद कराई। ये लोग ऐसा करते हैं कि पहले झूठे पंजीयन करा लेते हैं। दरअसल, सरकार की उपार्जन पंजीयन की नीति फेल है। उसमें कई खामियां हैं। जैसे कोई भी व्यक्ति सिकमी, बटाई में असीमित मात्रा में पंजीयन करा सकते है जबकि उसमें कैप होना चाहिए।
किसानों को सही बताने वाली अफसर सस्पेंड
विधायक अभय मिश्रा ने कहा- अलग-अलग नामों से पंजीयन करा लिया और किसानों को रसीदें दे दीं। रसीदें देने के बाद अलग-अलग फर्जी नामों से पैसा दे दिया। अंतिम में जब ये बचे हुए किसान अपना पैसा लेने गए तो एक अधिकारी रीना श्रीवास्तव ने रिपोर्ट दी कि किसानों के साथ गलत हो रहा है। कलेक्टर ने उसी अधिकारी को सस्पेंड कर दिया और कहा कि तुमने किसानों के पक्ष में क्यों बोला। उसके बाद एक कमेटी बनाई, उस कमेटी वालों ने किसानों से बात ही नहीं की और समिति प्रबंधक के पक्ष में रिपोर्ट बना दी।
किसानों के नाम पोर्टल से डिलीट करा दिए
विधायक ने आरोप लगाया कि कलेक्टर ने उन किसानों के नाम ऑनलाइन पोर्टल से डिलीट करा दिए। ये किसान झूठे हैं, किसान चोर हैं, इन्होंने कुछ नहीं बेचा। बाद में हल्ला मचा और दबाव बना तो बोलीं कि किसान सही हैं। इनका पैसा दिया जाए। अब किसानों के नाम पोर्टल से डिलीट हो गए तो पैसा कैसे देंगे? और पैसा बचा भी नहीं। अब कहते हैं कि डीएमएफ से दे देंगे, फला फंड से दे देंगे। बाकी लोग कहते हैं कि चोरी का पैसा तुम खा गए तो यहां से क्यों दे दें। अब वो किसान दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं।