आगर।
आगर मालवा जिले के नलखेड़ा में स्थित विश्व प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर की कीमती जमीन पर हुए अतिक्रमण को एमपी हाई कोर्ट के फैसले के बाद शुक्रवार देर रात जेसीबी की मदद से हटा दिया गया। यह मामला 2007 से चल रहा था, जब कुछ लोगों ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की थी। कोर्ट ने उनकी अपील खारिज कर दी और सरकार का अधिकार स्थापित किया।
हाईकोर्ट ने डिक्री को बताया था अवैध
हाई कोर्ट ने 1997 में मिली डिक्री को धोखे से और दस्तावेज छुपाकर प्राप्त किया गया बताया। कोर्ट ने कहा कि यह डिक्री कानूनी रूप से सही नहीं थी। कोर्ट ने यह भी पाया कि वसीयतनामा संदिग्ध था और पुराने सरकारी रिकॉर्ड मंदिर की पारंपरिक व्यवस्था की पुष्टि करते थे।
सरकार की ओर एडवोकेट सोनी ने रखा पक्ष
शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता आनंद सोनी ने कोर्ट में मजबूती से पक्ष रखा। उन्होंने सरकारी रिकॉर्ड, मंदिर की ऐतिहासिक स्थिति और फर्जी दस्तावेजों के बारे में विस्तार से बताया। कोर्ट ने माना कि धोखाधड़ी से जमीन पर गलत दावा किया गया था।
जेसीबी से हटाया गया अतिक्रमण
हाई कोर्ट के फैसले से मंदिर की जमीन सुरक्षित हो गई है। फैसला आने के बाद शुक्रवार रात को पुलिस, प्रशासन और अन्य विभागों की टीम ने मौके पर पहुंचकर जेसीबी से अतिक्रमण हटाया। इस कार्रवाई से अतिक्रमण करने वालों में हड़कंप मच गया। मौके पर मौजूद अधिकारियों ने इस बारे में कोई भी जानकारी देने से इनकार कर दिया।