भोपाल।
देश में आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा लाल आतंक दम तोड़ रहा है. हिंसक संगठन नक्सलवाद को मार्च 2026 तक जड़ से खत्म करने के लिए देश के गृह मंत्री अमित शाह ने डेडलाइन तय कर दी है. इसका जमीन पर असर भी दिखाई पड़ने लगा है. मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना झारखंड और ओडिशा के जंगलों में नक्सलवादियों के खिलाफ सुरक्षाबलों के ऑपरेशन लगातार जारी हैं. जिसमें लाखों रुपए के इनामी कई बड़े नक्सलवादी नेताओं को जवानों ने ढेर कर दिया है. वहीं, कई नामी नक्सली आत्मसमर्पण कर मुख्य धारा से जुड़ रहे हैं.
बालाघाट में महिला नक्सली ने किया सरेंडर
बालाघाट में 2 नवंबर को 14 लाख रुपए की इनामी नक्सली सुनीता ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने ट्वीट कर इस जानकारी को साझा किया है. उन्होंने ट्वीट कर लिखा कि "नक्सली सुनीता से बड़ी संख्या में हथियार व अन्य सामग्री बरामद की गई है. इस सफलता के लिए पुलिस बल प्रशंसा की पात्र है. अब जो कुछ नक्सली बचे हैं, वे आत्मसमर्पण करें या फिर पुलिस का सामना करने के लिए तैयार रहें.
अमित शाह की नीति का दिख रहा असर
बालाघाट में 12 साल बाद किसी नक्सली का यह आत्मसमर्पण है. सरेंडर करने वाली युवती का नाम सुनीता बताया जा रहा है और वो छत्तीसगढ़ के बीजापुर की निवासी है. वह बालाघाट में नक्सली गार्ड के रूप में काम कर रही थी. यह आत्मसमर्पण मध्य प्रदेश नक्सली पुनर्वास सह राहत नीति 2023 के तहत हुआ. इससे पहले साल 2013 में एक नक्सली ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया था. अब एक महिला नक्सली ने हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा से जुड़ने का फैसला किया. फिलहाल, गृहमंत्री अमित शाह द्वारा नक्सलियों के लिए समर्पण नीति लाई है. जिसके तहत नक्सलवाद को जड़ से साफ किया जा रहा है.
आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौट रहे नक्सली
छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश सहित नक्सल प्रभावित राज्यों में केंद्र सरकार द्वारा नक्सल उन्मूलन अभियान चलाया जा रहा है. सुरक्षा बलों द्वारा चलाए जा रहे सघन अभियान से नक्सलवाद की कमर टूट गई है. इस वजह से नक्सली आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौट रहे हैं. बीते कुछ महीनों में छत्तीसगढ़ में पुलिस को नक्सलियों के खिलाफ बड़ी सफलता मिली. सैकड़ों नक्सलियों ने सरकार के सामने लाल आतंक का रास्ता छोड़कर अपनी जिंदगी फिर से शुरू करने का फैसला किया था.