छिंदवाड़ा। 
 मध्य प्रदेश में खरीफ के मौसम में खाद के लिए हाहाकार मचा रहा. अब रबी की फसल के लिए भी खाद का भारी संकट है. इस बीच छिंदवाड़ा जिले में खाद वितरण को लेकर हो रहे हंगामे से बचने के लिए नई व्यवस्था बनाई गई है. छिंदवाड़ा जिला प्रशासन ने पटवारी के ऑडिट के बाद किसानों को खाद देने का फैसला किया है. इस नई व्यवस्था पर छिंदवाड़ा के पूर्व सांसद नकुल नाथ ने नाराजगी जताई है.
किसानों की आमदनी नहीं, मुसीबत दोगुनी कर दी
पूर्व सांसद नकुल नाथ ने बयान जारी कर कहा "भाजपा सरकार ने किसानों की आय नहीं बल्कि आफत और मुसीबत दोगुनी की है. कृषि यंत्रों से लेकर खाद, बीज और आवश्यक दवाइयां व मजदूरी सब कुछ महंगी हैं. महंगी नहीं है तो सिर्फ और सिर्फ किसान की उपज. खाद की कमी से फसलों की पैदावार प्रभावित, मौसम की मार से फसलें खराब. बची हुई उपज को बाजार मूल्य नहीं मिलना, किसानी को हानि का धंधा बना रही. इन सबके बाद सरकार का तुगलकी फरमान किसानों पर दुबले पर दोहरा आषाढ़ जैसा है. खाद के लिए किसानों को पटवारी से पावती सत्यापन वाला आदेश इसका उदाहरण है.
पटवारी के पीछे भटकेंगे किसान, अजीब है फरमान
नकुल नाथ ने कहा "खाद लेने के लिए पहले किसानों को पटवारी से पावती पर सत्यापन कराने वाला आदेश पूरी तरह अव्यवहारिक व तर्कहीन है. क्योंकि छिंदवाड़ा-पांढुर्ना जिले में खरीफ एवं रबी सीजन की फसलों के अलावा पूरे साल कई प्रकार की सब्जी, फूल और फलों की खेती भी होती है. पटवारी का कोई स्थाई कार्यालय नहीं होता, ऐसे में किसान पूरे साल सत्यापन के लिए पटवारी के पीछे कहां-कहां भटकते रहेंगे या फिर अपनी खेती-किसानी पर ध्यान देंगे."

वितरण केंद्र पर ही होनी चाहिए सारी जानकारी

नकुल नाथ ने कहा "वितरण केंद्र पर ही प्रबंधक द्वारा किसान के भूमि खाते पर दी जाने वाली खाद का की जानकारी होना चाहिए. यहां ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए कि किस भूमि खाते पर कितनी खाद दी जा रही, उसका रिकॉर्ड रखा जाए. जमीन का रिकॉर्ड ऑनलाइन है और किसान भाइयों को भी उनकी भूमि की पावती (CLR) ग्वालियर से डिजिटल साइन होकर प्राप्त होती है. लोक सेवा केंद्रों से CLR के हस्ताक्षर वाली सत्यापित प्रति प्राप्त होती है, इसके बाद उसे पटवारी से सत्यापित करवाने का कोई औचित्य नहीं है."