RSS पूर्व प्रचारक सिहोरा को जिला बनाने की मांग को लेकर करेंगे आमरण अनशन. भू समाधि लेने को तैयार लोग
जबलपुर।
सिहोरा को जिला बनाने की मांग में अब भारतीय जनता पार्टी के नेता और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व प्रचारक भी कूद पड़े हैं. आमरण अनशन की घोषणा करते हुए संघ के पूर्व प्रचारकों ने तो प्रतीकात्मक रूप से भू समाधि लेने की कोशिश भी की. सिहोरा को जिला बनाने की मांग लंबे समय से चली आ रही है और अब अपनी ही सरकार के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी के नेता भी खड़े हो रहे हैं.
सिहोरा को जिला बनाने की डिमांड क्यों?
जबलपुर से कटनी जाते वक्त लगभग 50 किलोमीटर दूर सिहोरा नाम का एक कस्बा आता है. यह स्थान फिलहाल नगर पालिका क्षेत्र है और यह जबलपुर की एक तहसील है. सिहोरा के रहने वाले आरएसएस के पूर्व प्रचारक और भारतीय जनता पार्टी के नेता प्रमोद साहू सिहोरा के लाखों लोगों में से एक हैं जिनकी यह मांग है कि सिहोरा को जिला बनाया जाए क्योंकि यह क्षेत्र जबलपुर के साथ रहकर विकसित नहीं हो पा रहा है और लोगों को पिछड़ापन झेलना पड़ता है. सिहोरा के रहने वाले लोगों का मानना है कि यदि सिहोरा अलग जिला बन जाता है तो क्षेत्र का ज्यादा विकास होगा लोगों को रोजगार मिलेगा.
जमीन में दफन होकर प्रदर्शन
सिहोरा के प्रमोद साहू ने बाकायदा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर यह घोषणा कर दी है कि यदि सरकार 6 नवंबर तक सिहोरा को जिला बनाने की घोषणा नहीं करती है तो वह आमरण अनशन शुरू कर देंगे. 2 दिन पहले सिहोरा में 'लक्ष्य सिहोरा' नाम के एक संगठन ने सिहोरा के एक मैदान में तीन फीट गहरे गड्ढे खुदवाए थे और दफन होकर प्रतीकात्मक समाधि लेने की कोशिश की.
पहले भी उठ चुकी है ऐसी मांग
ऐसा नहीं है कि सिहोरा को जिला बनाने की बात पहली बार उठी हो, दिग्विजय शासनकाल में सिहोरा को जिला बनाने की रणनीति बन चुकी थी. इसका नोटिफिकेशन होने ही वाला था कि दिग्विजय शासन काल खत्म हो गया. फिर उमा भारती ने भी यह घोषणा कर दी थी कि सिहोरा को जिला बनाया जाएगा. शिवराज सिंह चौहान ने अपने शासनकाल में दो बार सिहोरा में भाषण के दौरान या घोषणा की किसी हो रहा जिला बनेगा. बीते दिनों मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी यह भरोसा दिलाया है कि वह जल्दी ही सिहोरा को जिला बनाने की घोषणा करेंगे. लेकिन अब लोग भरोसा नहीं कर रहे हैं और उन्होंने आंदोलन की राह पकड़ ली है.
सिहोरा उपेक्षा का शिकार
स्थानीय लोगों का कहना है कि सिहोरा में खुद 140 गांव जुड़े हुए हैं. सिहोरा नगर पंचायत है, सिहोरा के पास ही जबलपुर की मझौली और कटनी की बहोरीबंद और ढीमरखेड़ा तहसील है. यह सभी स्थान उपेक्षा का शिकार हैं और अपने जिला मुख्यालय से काफी दूर हैं. इसलिए इन सभी को मिलाकर जिले का स्वरूप दिया जा सकता है.
सिहोरा कई मामलों में महत्वपूर्ण स्थान
लोग सिहोरा को मिनी भिलाई भी कहते हैं क्योंकि यहां पर जमीन के अंदर बड़ी तादाद में आयरन ओर है. यहीं पर सफेद संगमरमर की खदान है और बीते दिनों सिहोरा के पास ही सोने का भंडार होने की संभावना व्यक्त की गई है. लोगों का मानना है कि यदि सिहोरा जिला बन जाता है तो जमीन के भीतर का यह अयस्क जमीन के ऊपर रहने वाले लोगों को रोजगार दे पाएगा.

योगी आदित्यनाथ ने थारू परिवारों को दिया जमीन का मालिकाना हक
इस्तीफे की अटकलों के बीच Nitish Kumar ने सीएम हाउस खाली करना शुरू किया