भोपाल, सबकी खबर। 
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान एक बार फिर विवादों के घेरे में हैं। चर्चा इस बात की है कि भोपाल में आयोजित महिला किसान दिवस के कार्यक्रम में भीड़ जुटाने के लिए मध्य प्रदेश राज्य आजीविका मिशन का उपयोग किया गया। सूत्रों के अनुसार इस आयोजन में प्रत्येक जिले से 50 महिला किसानों को भोपाल बुलाया गया था और इसके लिए बाकायदा आजीविका मिशन के उपायुक्त शशि भूषण सिंह के हस्ताक्षर से आदेश जारी किया गया।
जानकारी के मुताबिक, 6 अक्टूबर को जारी पत्र में सभी जिला पंचायत सीईओ और जिला परियोजना अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि 15 अक्टूबर को भोपाल के रविंद्र मोहन सभागार में आयोजित महिला किसान दिवस में भाग लेने के लिए चयनित महिलाओं को भेजा जाए। उनके आने-जाने, ठहरने और भोजन की व्यवस्था की जिम्मेदारी एक एनजीओ प्रधान संस्था को सौंपी गई थी, जिसने यह कार्यक्रम आयोजित किया।
कार्यक्रम का आयोजन सरकारी नहीं, बल्कि एनजीओ के बैनर तले किया गया था, लेकिन इसमें शिवराज सिंह चौहान को मुख्य अतिथि बनाया गया। खास बात यह रही कि आयोजन में आजीविका मिशन से जुड़े कोई वरिष्ठ अधिकारी, मंत्री या पंचायत विभाग की एसीएस और सीईओ उपस्थित नहीं थे। यानी विभागीय उपस्थिति शून्य रही, परंतु विभाग के संसाधन और कर्मचारी भीड़ जुटाने में सक्रिय दिखाई दिए।
कार्यक्रम के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि वे महिला किसानों के जीवन में खुशहाली लाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए संकल्पित हैं। हालांकि, राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठ रहा है कि क्या केंद्रीय मंत्री बनने के बाद भी शिवराज सिंह अपने राजनीतिक प्रभाव को बनाए रखने के लिए सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल कर रहे हैं?
पूर्व में भी जब शिवराज सिंह मुख्यमंत्री थे, तब आजीविका मिशन के माध्यम से महिलाओं को सभाओं में लाने का कार्य हुआ करता था। अब, जब वे केंद्र में मंत्री हैं, तब भी वही प्रक्रिया दोहराई जा रही है — जिससे यह पूरा मामला संदेह के घेरे में है।
जानकारों का कहना है कि आयोजन में लाखों रुपये का खर्च हुआ और यह स्पष्ट नहीं है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की स्वीकृति इस आयोजन के लिए ली गई थी या नहीं। इस बीच, विभागीय मंत्री प्रह्लाद पटेल की अनुपस्थिति ने भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या राज्य सरकार इस पूरे मामले की जांच करवाएगी, या इसे “सामान्य एनजीओ कार्यक्रम” कहकर नजरअंदाज कर दिया जाएगा।