विधायकों की नाराजगी के बाद हटे कलेक्टर:14 साल में पहली बार DM बनी नेहा की कलेक्टरी आठ महीने में गई, 24 IAS में 7 विवादों में घिरे
भोपाल।
मप्र सरकार ने मंगलवार को 12 जिलों के कलेक्टरों सहित 24 आईएएस अफसरों के तबादले किए हैं। इनमें से सात आईएएस अफसर ऐसे हैं जो विवादों में घिरे रहे हैं। डिंडोरी, भिंड के कलेक्टर बीजेपी विधायकों से विवाद के बाद हटाए गए हैं।
जानिए किस अफसर के साथ क्या विवाद जुड़ा
नेहा मारव्या (कलेक्टर डिंडोरी): 14 साल में पहली बार कलेक्टर बनीं 8 महीने में ही हटीं
2011 बैच की आईएएस अफसर नेहा मारव्या को 14 साल में पहली बार कलेक्टर बनाया गया था। वे डिंडोरी में बतौर कलेक्टर मात्र 8 महीने ही रह पाईं। शहपुरा से बीजेपी विधायक और पूर्व मंत्री ओमप्रकाश धुर्वे ने उनकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे। इसके बाद उन्हें डिंडोरी कलेक्टर से हटाकर विमुक्त घुमंतू, अर्द्धघुमंतू विभाग में संचालक बनाकर भोपाल भेजा है। नौ महीने पहले उन्होंने आईएएस अफसरों की मीटिंग में फील्ड में की जाने वाली पोस्टिंग्स में भेदभाव का मुद्दा उठाया था।
विधायक बोले- मुर्गा-बकरा खाने के लिए कलेक्टर को भेजा है?:ऐसी अफसर जिले में रहने लायक नहीं
एक महीने पहले डिंडोरी कलेक्टर कार्यालय की जनसुनवाई के दौरान शहपुरा के भाजपा विधायक ओमप्रकाश धुर्वे ने कलेक्टर नेहा मारव्या पर कई आरोप लगाए। विधायक ने कहा कि जनसुनवाई में अधिकारी न तो आवेदनों पर तारीख लिखते हैं और न ही समस्याओं का निराकरण करते हैं।
विधायक ओमप्रकाश ने कलेक्टर पर आरोप लगाया कि वे ग्रामीणों से अभद्र व्यवहार करती हैं। एक बैगा आदिवासी महिला बुधिया बाई ने बताया कि उनके नाती की मौत के बाद सहायता राशि के लिए एक महीने से चक्कर लगा रही हैं। जब वह विधायक के साथ कलेक्टर से मिलने गईं, तो उन्हें फटकार लगाई गई।
विधायक बोले- ऐसी कलेक्टर डिंडोरी में रहने लायक नहीं
विधायक ने कहा कि कलेक्टर नेहा मारव्या से मिलने गए तो वह कहती हैं कि मेरी जवाबदारी नहीं है। विभागीय अधिकारियों से ही मिलना है तो फिर जनसुनवाई का क्या मतलब है। मेरे सामने बैगा आदिवासियों को डांट-फटकार रही है। मुर्गा, बकरा खाने के लिए कलेक्टर बनी है क्या? ऐसी कलेक्टर डिंडोरी जिले में रहने लायक नहीं है।
भिंड कलेक्टर को बीजेपी विधायक ने गाली दी, चोर कहा
संजीव श्रीवास्तव (कलेक्टर भिंड): विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाह और कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव के बीच 27 अगस्त को विवाद हुआ था। विधायक कुशवाह ने ऑफिसर कॉलोनी में कलेक्टर के बंगले के बाहर धरना दे दिया था। उन्होंने कहा कि जिले में खाद की समस्या है। साथ ही, कलेक्टर पर रेत चोरी के आरोप लगाए थे। कलेक्टर ने भी विधायक से कहा था कि मैं रेत चोरी नहीं होने दूंगा।
कलेक्टर ने विधायक को अंगुली दिखाई, तो विधायक ने मुक्का दिखाया। विधायक कुशवाह ने यहां कहा था कि कलेक्टर का ट्रांसफर किया जाए। इस विवाद के 34 दिन बाद ही कलेक्टर का ट्रांसफर हो गया। संजीव श्रीवास्तव को लोक निर्माण विभाग भोपाल में अपर सचिव के रूप में पदस्थ किया है।
मंत्री, सांसद ने कहा था फोन नहीं उठाते कमिश्नर
हरेन्द्र नारायण (नगर निगम आयुक्त भोपाल): भोपाल नगर निगम कमिश्नर हरेन्द्र नारायण की कार्यप्रणाली पर राजधानी के बीजेपी नेता खासे नाराज थे। मंत्री विश्वास सारंग, सांसद आलोक शर्मा, विधायक भगवानदास सबनानी ने हरेन्द्र नारायण पर फोन न उठाने और जनता की समस्याओं की अनदेखी के आरोप लगाए थे। हरेन्द्र नारायण को छिंदवाड़ा कलेक्टर बनाया गया है।
हाईकोर्ट ने लगाई थी फटकार
चंद्रशेखर शुक्ला (कलेक्टर सिंगरौली): सिंगरौली में जमीनों के गलत तरीके से अधिग्रहण किए जाने के मामले में छह महीने पहले मार्च में मप्र हाईकोर्ट ने तल्ख टिप्पणी की थी। हाईकोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश सुरेश कुमार कैत ने सिंगरौली कलेक्टर चंद्रशेखर शुक्ला को कड़ी फटकार लगाई थी। चंद्रशेखर शुक्ला को हटाकर राजस्व विभाग में उप सचिव बनाया गया है।
सिवनी कलेक्टर पर सहायक संचालक ने लगाया था प्रताड़ना का आरोप
संस्कृति जैन(कलेक्टर सिवनी): सिवनी कलेक्टर संस्कृति जैन पर उद्यानिकी विभाग की सहायक संचालक डॉ आशा उपवंशी ने सात-आठ महीनों से मानसिक रूप से प्रताड़ित करने और अपमानित करने के आरोप लगाए थे। आशा उपवंशी ने कलेक्टर के नाम 5 जून को एक पत्र लिखा था जिसके बाद ये मामला सामने आया था। संस्कृति जैन को अब भोपाल नगर निगम में कमिश्नर बनाया गया है।
सरकारी जमीन को बेचने की परमिशन देकर विवादों में आईं
जमुना भिड़े: राजभवन के जनजातीय प्रकोष्ठ की सचिव जमुना भिड़े निवाड़ी कलेक्टर बनाई गई हैं। जमुना भिड़े ने इंदौर संभाग की अपर आयुक्त रहते हुए रंगवासा राऊ क्षेत्र में सरकारी जमीन को बेचने की मंजूरी देने के मामले में विवादों में रही हैं। इंदौर कलेक्टर इलैया राजा टी ने जमीन के बेचने की मंजूरी नहीं दी थी। भिड़े ने कलेक्टर के आदेश को गलत बता दिया था। कलेक्टर की समीक्षा में यह मामला संज्ञान में आने के बाद इस सरकारी जमीन को वापस शासकीय करने के लिए राजस्व बोर्ड में कलेक्टर की ओर से अपील कराई गई थी।
कांग्रेसियों ने कुत्ते के गले में टांग दिया था कलेक्टर के नाम ज्ञापन
शीलेन्द्र सिंह(कलेक्टर छिंदवाड़ा): प्रदर्शन के दौरान ज्ञापन लेने नहीं आए तो कांग्रेसियों ने कुत्ते के गले में कलेक्टर के नाम ज्ञापन बांध दिया था। शीलेन्द्र सिंह का छतरपुर में कलेक्टर रहते हुए चंदला विधायक राजेश प्रजापति से विवाद हुआ था। इसके अलावा छतरपुर में संविदा कर्मचारियों को बर्खास्त किए जाने के मामले में तत्कालीन कलेक्टर शीलेन्द्र सिंह हाईकोर्ट ने सात दिन की सजा सुनाई थी। इस मामले में कोर्ट ने 50 हजार रुपए का जुर्माना लगाया था।

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