निर्देश- बिना हेलमेट वाले पुलिसकर्मियों का चालान कटेगा, लाइसेंस अमान्य होगा
भोपाल। 

मुझे यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि पुलिस जिस हेलमेट की खुद जांच करती है, वह चेकिंग पॉइंट पर बगैर हेलमेट लगाए ही आते-जाते नजर आते हैं। ऐसा दूसरे सरकारी अधिकारी-कर्मचारी भी करते हैं। जब सरकारी लोग नियमों का पालन करेंगे तो आम लोग खुद ही नियमों का अनुपालन करने लगेंगे।
यह बात कोकता स्थित आरटीओ दफ्तर में आयोजित 51 सुविधाओं के शुभारंभ के दौरान स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहीं। नियमों का पालन न करने वालों का उदाहरण देते हुए उन्होंने ऐसा कहा था। मंत्री के इस बयान के कुछ देर बाद ही एडीजी पीटीआरआई शाहिद अबसार ने हेलमेट न लगाकर दो पहिया वाहन चलाने वाले पुलिसकर्मियों के लिए एक अलग आदेश जारी कर दिया। इसके तहत ऐसे पुलिसकर्मियों के खिलाफ मोटरयान अधिनियम की धारा 194-डी के तहत चालानी कार्रवाई की जाए, जिसमें जुर्माने का प्रावधान एक हजार रुपए तक है। इसके अलावा ड्राइविंग लाइसेंस को तीन महीने तक अयोग्य भी घोषित किया जा सकता है।
एडीजी ने लिखा है ऐसा देखा गया है कि दो पहिया वाहन चलाने वाले कुछ पुलिस अधिकारी/कर्मचारी बिना हेलमेट के वाहन चलाते हैं। पिछले वर्षों में कुछ पुलिस अधिकारी-कर्मचारी वाहन दुर्घटना के शिकार हुए हैं और हेलमेट नहीं पहनने के कारण उन्हें गंभीर चोट भी आई है। दुर्भाग्य से कुछ की मृत्यु भी हुई है। सोशल मीडिया पर ऐसे पुलिस अधिकारी-कर्मचारियों के बिना हेलमेट पहने वाहन चलाने के वीडियो भी वायरल होते हैं। आम लोगों के हेलमेट नहीं पहनने पर पुलिस चालानी कार्रवाई करती है, जबकि कुछ पुलिस अधिकारी-कर्मचारी खुद हेलमेट नहीं पहनते हैं।
जारी निर्देशों में यह कहा

  • सभी पुलिस थानों-पुलिस लाइन और अन्य पुलिस इकाइयों में गणना के दौरान या रोलकॉल में सभी पुलिस अधिकारी-कर्मचारियों को हेलमेट पहनने के लिए जागरुक व पाबंद किया जाए।
  • वाहन चेकिंग के दौरान ट्रैफिक नियमों का पालन न करने वाले पुलिस अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ मोटरयान अधिनियम के तहत चालानी कार्रवाई करें। साथ ही लाइसेंस अमान्य करें।
  • उपरोक्त कार्रवाई के बाद भी यदि किसी पुलिस अधिकारी-कर्मचारी ने हेलमेट धारण नहीं किया हो तो उनके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई भी करें।
  • निर्देशित किया जाता है कि उपरोक्तानुसार अपने अधीनस्थ पुलिस अधिकारी-कर्मचारियों को हेलमेट पहनना अनिवार्य किया जाए। साथ ही हर महीने उल्लंघन की स्थिति में की गई कार्रवाई की समीक्षा, इकाई प्रमुख के स्तर पर की जाए।